Health News: रात में नाभि में सरसों-नीम का तेल लगाते हैं दिलजीत दोसांझ, डर्मेटोलॉजिस्ट से जानिए सच
त्वचा के लिए कितना सुरक्षित है सरसों और नीम का तेल? नाभि में लगाने से पहले पढ़ें ये खबर
Health News: अपनी बहुचर्चित फिल्म ‘सतलुज’ और देश-विदेश में अपने म्यूजिक शोज को लेकर लगातार सुर्खियों में बने रहने वाले ग्लोबल स्टार दिलजीत दोसांझ ने हाल ही में एक पॉडकास्ट के रैपिड-फायर राउंड में अपनी एक खास दिनचर्या का जिक्र किया। दिलजीत ने बताया कि वे चाहे दुनिया के किसी भी कोने में चले जाएं, उनके ट्रैवल बैग में दो चीजें हमेशा मौजूद रहती हैं—नीम का तेल और सरसों का तेल। उनका दावा है कि रात को सोने से पहले इन दोनों तेलों को नाभि (बेली बटन) में लगाने से उन्हें अद्भुत स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।
आयुर्वेद और पारम्परिक भारतीय चिकित्सा में नाभि में तेल लगाने (नाभी पूरण या बेली बटन ऑयलिंग) को काफी महत्वपूर्ण माना गया है। लेकिन जब बात दिलजीत दोसांझ जैसी बड़ी शख्सियत की सलाह की हो, तो आम लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि आधुनिक मेडिकल साइंस इस पर क्या रुख रखता है। इस विषय पर विस्तृत जानकारी के लिए हमने ‘सिटरीन स्किन क्लिनिक’ (गुरुग्राम) की डायरेक्टर और जानी-मानी डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. नीति गौर से बातचीत की।
क्या कहता है मेडिकल साइंस?
डॉ. नीति गौर का कहना है कि दिलजीत दोसांझ एक बहुत बड़े सेलिब्रिटी हैं और हो सकता है कि यह उनका व्यक्तिगत अनुभव हो, जिससे उन्हें फायदा पहुंचता हो। हालांकि, जब हम इसे विज्ञान की कसौटी पर परखते हैं, तो तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है।
डॉ. नीति के अनुसार, “जब आप त्वचा के किसी हिस्से पर सरसों या नीम का तेल लगाते हैं, तो उसका असर केवल उसी ‘लोकल एरिया’ यानी स्थानीय त्वचा तक सीमित रहता है। सरसों के तेल में पाए जाने वाले फैटी एसिड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स सूखी त्वचा को हाइड्रेट और मॉइस्चराइज करने में मदद करते हैं। लेकिन अभी तक ऐसी कोई मेडिकल रिसर्च या वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है जो यह साबित करे कि नाभि में तेल की कुछ बूंदें डालने से वह पूरे शरीर के अंदरूनी अंगों में जाकर कोई चमत्कारी पोषण पहुंचाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि आयुर्वेद की कई पारंपरिक तकनीकों का अपना महत्व है और हम उनका सम्मान करते हैं, लेकिन वैज्ञानिक नजरिए से नाभि के जरिए पूरे शरीर का कायाकल्प होने की बात का कोई ठोस आधार नहीं है।
नीम और सरसों के तेल के फायदे, लेकिन इन खतरों से रहें सावधान
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मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नीम के तेल में प्रचुर मात्रा में ‘एंटीमाइक्रोबियल’ और ‘एंटी-इन्फ्लेमेटरी’ गुण होते हैं जो बैक्टीरिया से बचाते हैं। वहीं, सरसों का तेल त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत (स्किन बैरियर) को मजबूत करता है। लेकिन कुदरती या ऑर्गेनिक होने का मतलब यह कतई नहीं है कि ये चीजें हर किसी के लिए सुरक्षित ही हों।
डॉ. नीति गौर ने सचेत करते हुए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु बताए:
त्वचा में एलर्जी और जलन: संवेदनशील (सेंसिटिव) त्वचा वाले लोगों में नीम का तेल एलर्जी, रेडनेस, खुजली या जलन पैदा कर सकता है। सरसों का तेल भी कई बार ‘कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस’ का कारण बन जाता है।
संक्रमण (Infection) का जोखिम: हमारी नाभि एक ऐसा हिस्सा है जहां पसीना और गंदगी आसानी से जमा हो जाती है। अगर नाभि को अच्छे से साफ किए बिना उसमें तेल डाला जाए, तो नमी और तेल मिलकर बैक्टीरिया व फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बना देते हैं, जिससे वहां गंभीर फंगल इंफेक्शन हो सकता है।
विशेषज्ञ की सलाह: यदि कोई व्यक्ति नाभि में तेल लगाता है और उसे किसी भी तरह की खुजली, दाने, लालिमा या बेचैनी महसूस होती है, तो उसे तुरंत इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए और किसी योग्य त्वचा विशेषज्ञ (Dermatologist) से परामर्श लेना चाहिए।
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