August 7, 2026

Ambala News: हरियाणा की नई फ्री होल्ड पॉलिसी पर बवाल, अंबाला में अनिल विज ने अपनी ही सरकार को दी चेतावनी

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Ambala News: हरियाणा की नई फ्री होल्ड पॉलिसी पर बवाल, अंबाला में अनिल विज ने अपनी ही सरकार को दी चेतावनी

अंबाला में अनिल विज ने अपनी ही सरकार को दी चेतावनी

Ambala News: हरियाणा सरकार की प्रस्तावित फ्री होल्ड पॉलिसी इस समय प्रदेश में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। सरकार इसे लीजधारकों को स्थायी मालिकाना हक देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बता रही है। हालांकि, धरातल पर, खासकर अंबाला छावनी में, इस नीति को लेकर उत्साह से अधिक संशय और गुस्सा दिखाई दे रहा है। पीढ़ियों से लीज की जमीन पर रह रहे हजारों परिवार मालिकाना हक तो चाहते हैं, लेकिन इसके लिए तय की गई फीस और कठोर शर्तों ने उनकी रातों की नींद उड़ा दी है।

150 साल पुराना इतिहास और बंसीलाल दौर का 1977 का समझौता

अंबाला छावनी की वर्तमान स्थिति को समझने के लिए इसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को जानना जरूरी है। 5 फरवरी 1977 तक यह पूरा क्षेत्र कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन था। उस समय तत्कालीन रक्षा मंत्री बंसीलाल के कार्यकाल में करीब 1063 एकड़ भूमि को कैंटोनमेंट से अलग कर नगर पालिका को सौंपने का फैसला हुआ था। इसके बदले सेना को 150 एकड़ जमीन दी जानी थी। कैबिनेट मंत्री अनिल विज के अनुसार, लंबे समय तक यह मामला लटका रहा और बाद में उनके प्रयासों से सेना को जमीन देकर हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हुई। इसके बावजूद रजिस्ट्रियों में केवल भवन का नाम चढ़ाया गया और जमीन सरकार के नाम ही रही, जिससे लोगों की व्यावहारिक दिक्कतें खत्म नहीं हुईं।

कलेक्टर रेट, 25% एडवांस और सीलिंग का डर: क्यों भड़के लोग?

फ्री होल्ड पॉलिसी के मौजूदा ड्राफ्ट ने लोगों की चिंताएं कई गुना बढ़ा दी हैं। सबसे बड़ी आपत्ति जमीन का मूल्य 100% कलेक्टर रेट के आधार पर तय करने को लेकर है। उदाहरण के लिए, यदि किसी के पास 1000 गज का प्लॉट है और कलेक्टर रेट 60 हजार रुपये प्रति गज है, तो उसे करोड़ों रुपये चुकाने होंगे। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह रकम जुटाना नामुमकिन है।

इसके अलावा, आवेदन के साथ ही 25 प्रतिशत राशि तुरंत जमा कराने और बाकी 75 प्रतिशत राशि एक साल के भीतर देने की शर्त रखी गई है। समय पर भुगतान न होने पर संपत्ति को सील करने और सरकार द्वारा अपने कब्जे में लेने का प्रावधान है। सबसे बड़ा पेंच 150 साल पुराने मूल दस्तावेज जमा कराने की शर्त पर फंसा है, जो दशकों पुरानी पीढ़ियों के बदलाव में खो चुके हैं।

अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े हुए मंत्री अनिल विज

इस पूरे मामले ने अब गंभीर राजनीतिक मोड़ ले लिया है। अंबाला छावनी से सात बार के विधायक और हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने वकीलों के साथ ड्राफ्ट का अध्ययन करने के बाद छह प्रमुख आपत्तियां दर्ज कराई हैं। विज ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दिया है कि यदि जनता के हितों की अनदेखी की गई और लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ा, तो वह सरकार के बजाय अपनी जनता के साथ खड़े होंगे। जब कैबिनेट बैठक में यह एजेंडा आया, तो उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष भी अपनी आपत्तियां पुरजोर तरीके से रखीं।

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