August 8, 2026

Haryana Horticulture Scam: हरियाणा बागवानी विभाग में बड़ा घोटाला: 13 साल बाद संयुक्त निदेशक डॉ. सुधीर यादव समेत 8 पर एफआईआर

0
Haryana Horticulture Scam: हरियाणा बागवानी विभाग में बड़ा घोटाला: 13 साल बाद संयुक्त निदेशक डॉ. सुधीर यादव समेत 8 पर एफआईआर

हरियाणा बागवानी विभाग में बड़ा घोटाला: 13 साल बाद संयुक्त निदेशक डॉ. सुधीर यादव समेत 8 पर एफआईआर

Haryana Horticulture Scam: हरियाणा के बागवानी विभाग में सरकारी अनुदान और योजनाओं की आड़ में हुए बड़े फर्जीवाड़े का मामला अब आखिरकार थाने की चौखट तक पहुंच गया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने करीब 13 साल तक चली लंबी और गहन जांच के बाद विभाग के वर्तमान संयुक्त निदेशक डॉ. सुधीर यादव समेत आठ अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कर लिया है। जिस वक्त यमुनानगर जिले में बागवानी योजनाओं के नाम पर इस कथित घोटाले को अंजाम दिया गया, उस दौरान डॉ. सुधीर यादव वहां जिला बागवानी अधिकारी की कुर्सी संभाल रहे थे।

कागजी बागवानी का खेल: रिकॉर्ड में 35 एकड़ का बाग, मौके पर एक भी जिंदा पौधा नहीं

एसीबी की जांच रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, वे सरकारी महकमों में होने वाले फर्जीवाड़े की बानगी भर हैं। यमुनानगर के गांव रजहेड़ी में वर्ष 2006-07 के दौरान सरकारी सब्सिडी पर लगाए गए बागों की जब भौतिक जांच की गई, तो अधिकारी भी दंग रह गए। रिकॉर्ड में नारायण सिंह के परिवार के नाम 35 एकड़ में आम और सुदेश कुमारी के नाम 5 एकड़ में चीकू का बाग दर्ज था, लेकिन धरातल पर 100 फीसदी पौधे मृत पाए गए। इसी तरह गांव के ही एक अन्य किसान के एक एकड़ में लगे बाग का नामोनिशान तक गायब मिला।

किसानों ने खोदे गड्ढे, भुगतान हुआ ठेकेदारों को; 6.30 लाख के बीज दफ्तर में ही सड़े

जांच में फर्जीवाड़े का दायरा सिर्फ कागजी पौधों तक सीमित नहीं रहा। किसानों ने आरोप लगाया कि पौधारोपण के लिए निर्धारित 32 हजार रुपये के बजाय उन्हें हाथ में सिर्फ 15 हजार दिए गए। हद तो तब हो गई जब गड्ढे खुद किसानों ने खोदे, लेकिन सरकारी बही-खातों में पूरा भुगतान किसी चहेते ठेकेदार को होना दर्शा दिया गया। इतना ही नहीं, शिवालिक डेवलपमेंट स्कीम के तहत खरीदे गए 6.30 लाख रुपये के सब्जियों के बीज किसानों को बांटने के बजाय दफ्तर की अलमारियों में बंद रखे गए, जो रखे-रखे एक्सपायर हो गए।

वर्मी कंपोस्ट गायब और 16.50 लाख का फटका: 2013 की जांच पर अब जागी खाकी

जैविक खेती को बढ़ावा देने के नाम पर भी जमकर जेबें भरी गईं। गांव अलाहड़ में जिस किसान के नाम पर वर्मी कंपोस्ट यूनिट का कागजी खाका तैयार किया गया था, मौके पर वैसी कोई यूनिट मिली ही नहीं। एसीबी के मुताबिक, केवल पुराने बागों के पुनरुद्धार के 110 हेक्टेयर के फर्जी लक्ष्य में ही सरकारी खजाने को 16.50 लाख रुपये का सीधा नुकसान पहुंचाया गया। मार्च 2013 में शुरू हुई इस जांच की अंतिम रिपोर्ट जुलाई 2025 में शासन को भेजी गई थी, जिसके बाद अब हरी झंडी मिलते ही एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

यह भी पढ़ें– Charkhi Dadri News: चरखी दादरी में थाने के बाहर गोलियां चलाने वाला रोहित कातिया एनकाउंटर में गिरफ्तार, 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed