Bhiwani News: भिवानी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील दुकान की दीवार तोड़कर दवाइयां गायब

भिवानी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील दुकान की दीवार तोड़कर दवाइयां गायब
Bhiwani News: भिवानी जिले में अवैध नशे की दवाइयों और प्रतिबंधित गर्भपात किट की बिक्री के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा भारी मात्रा में नशीली दवाइयां बरामद कर सील किए गए परिसर से चोर दीवार तोड़कर पूरी खेप उड़ा ले गए। जिस परिसर की सुरक्षा और निगरानी का जिम्मा पुलिस प्रशासन का था, वहीं से इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयां गायब हो जाने से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
4 तारीख को हुई थी बड़ी छापेमारी, पुलिस सुरक्षा में सील हुआ था परिसर
पूरे मामले का खुलासा करते हुए भिवानी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रघुबीर सिंह शांडिल्य ने बताया कि बीते 4 तारीख को स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर एक ठिकाने पर दबिश दी थी। मौके पर तीन दुकानें पाई गईं, जिनमें से एक में अवैध रूप से क्लीनिक चलाया जा रहा था। वहां से बड़ी मात्रा में नशीली और गर्भपात से जुड़ी संदिग्ध दवाइयां बरामद हुईं। विभाग की टीम ने पूरी इन्वेंट्री तैयार कर कमरों को सील कर दिया था और परिसर की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस विभाग के सुपुर्द कर दी गई थी।
पीछे की दीवार तोड़कर पार कर दी दवाइयां, CMO ने जताया कड़ा ऐतराज
हैरानी की बात यह रही कि सीलिंग के महज कुछ ही दिनों बाद शातिर अपराधियों ने दुकान के पीछे की दीवार को तोड़ा और भीतर रखी सारी अवैध दवाइयां निकालकर फरार हो गए। सीएमओ डॉ. शांडिल्य ने इस पर पुलिस की कार्यप्रणाली और ढुलमुल रवैये पर सीधा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि छापेमारी के दौरान भी जब मुख्य आरोपी के गांव में होने की खबर मिली थी, तब भी पुलिस टीम ने उसे पकड़ने में कोई मुस्तैदी नहीं दिखाई। अब सील परिसर से दवाइयां गायब होना पुलिस की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर सीधे-सीधे सवाल खड़े करता है।
DC और SP को लिखा जाएगा पत्र, दोबारा दर्ज होगी FIR
स्वास्थ्य विभाग ने मौके की पूरी वीडियोग्राफी करवा ली है और अब इस मामले में नए सिरे से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सीएमओ ने साफ किया कि वे इस मामले की लिखित शिकायत जिला उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) को भेज रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीते छह महीनों से स्टेट टास्क फोर्स के निर्देशों पर अवैध क्लीनिकों और मेडिकल स्टोरों के खिलाफ कार्रवाई जारी है, लेकिन बिना पुलिस के सक्रिय सहयोग के नशे के इस काले कारोबार पर पूरी तरह नकेल कसना बेहद चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
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