Karnal SDM Office Fire: करनाल जिला सचिवालय में भीषण आग, एसडीएम दफ्तर की अहम फाइलें और सामान जला

करनाल जिला सचिवालय में भीषण आग, एसडीएम दफ्तर की अहम फाइलें और सामान जला
Karnal SDM Office Fire: मंगलवार की अलसुबह करनाल का जिला सचिवालय अचानक धुएं के गुबार से घिर गया। करीब 8 बजे एसडीएम दफ्तर में अचानक भड़की लपटों ने देखते ही देखते पूरे कमरे को अपनी आगोश में ले लिया। आग की विकरालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कमरे में रखा तमाम सरकारी सामान, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और लकड़ी के दरवाजे-खिड़कियां मिनटों में स्वाहा हो गए। संयोग अच्छा था कि शिवरात्रि का त्योहार होने के चलते दफ्तर में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
धुआं उठते ही सचिवालय परिसर में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को इसकी सूचना दी। दमकल की दो गाड़ियां आनन-फानन में मौके पर पहुंचीं। करीब एक घंटे तक चले मशक्कत भरे राहत कार्य के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका। हालांकि, तब तक एसडीएम देवेंद्र शर्मा के दफ्तर का अधिकांश हिस्सा तबाह हो चुका था। जो जरूरी कागजात आग की भेंट चढ़ने से बच भी गए, वे पानी की बौछारों के चलते पूरी तरह खराब हो गए।
पहली मंजिल तक पहुंची लपटें, प्रशासन में मचा हड़कंप
कमरे की खिड़कियों से निकलती आग की लपटें काफी भयावह थीं, जो ऊपर पहली मंजिल की दीवार को छूने लगी थीं। हालांकि दमकलकर्मियों की मुस्तैदी से इसे बाकी कमरों में फैलने से रोक लिया गया। घटना की खबर मिलते ही जिला उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा और एसडीएम देवेंद्र शर्मा प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचे। शुरुआती जांच के बाद पुलिस उपनिरीक्षक विकास ने अंदेशा जताया है कि बिजली का शॉर्ट सर्किट ही इस हादसे का कारण बना है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे नुकसान का आकलन किया जा रहा है। एसडीएम देवेंद्र शर्मा ने बताया कि सुबह सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंच गए थे। उनके अनुसार दफ्तर के कंप्यूटर, सोफे, कुर्सियां और रिकॉर्ड पूरी तरह जल चुके हैं। नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी।
मॉक ड्रिल के दावों पर उठे सवाल
इस घटना ने प्रशासनिक दावों पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। गौरतलब है कि महज कुछ ही दिन पहले जिला सचिवालय परिसर में आपातकालीन स्थिति और आपदा प्रबंधन से निपटने को लेकर एक विस्तृत मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी। इसके बावजूद, वास्तविक संकट के समय दफ्तर का एक बड़ा हिस्सा खाक होने से यह सवाल उठने लगा है कि क्या ऐसे संवेदनशील सरकारी परिसरों में आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं।
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