August 11, 2026

Jind News: सावन शिवरात्रि पर जींद की ‘ड्राइवर छोरी’ की अनूठी कांवड़, हरिद्वार से जल लाकर बीमार माता-पिता को कराया स्नान

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Jind News: सावन शिवरात्रि पर जींद की 'ड्राइवर छोरी' की अनूठी कांवड़, हरिद्वार से जल लाकर बीमार माता-पिता को कराया स्नान

सावन शिवरात्रि पर जींद की 'ड्राइवर छोरी' की अनूठी कांवड़

Jind News: सावन की पावन शिवरात्रि के मौके पर पूरे हरियाणा में भक्ति और आस्था का ज्वार देखने को मिल रहा है। प्रदेश के कोने-कोने में स्थित ऐतिहासिक और स्थानीय शिव मंदिरों में अलसुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। क्या बूढ़े, क्या बच्चे और क्या महिलाएं—हर कोई हाथों में जल, बेलपत्र और भांग-धतूरा लिए भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहा है। इस पावन अवसर पर हरिद्वार और गोमुख से गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़ियों का उत्साह देखते ही बन रहा है, जिनमें कई अनूठी और मिसाल पेश करने वाली कांवड़ें लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

हरिद्वार से गंगाजल लाकर जींद की बेटी ने पेश की अनूठी मिसाल

इन सब के बीच जींद जिले के हाड़वा गांव से आई एक खबर ने सभी का दिल जीत लिया है। इलाके में ‘ड्राइवर छोरी’ के नाम से मशहूर निशु देशवाल इस बार हरिद्वार से कंधे पर कांवड़ उठाकर पैदल पहुंचीं। निशु ने यह कांवड़ किसी व्यक्तिगत मन्नत के लिए नहीं, बल्कि अपने बुजुर्ग और बीमार माता-पिता के लिए उठाई थी। गांव पहुंचते ही निशु ने सबसे पहले हरिद्वार से लाए पवित्र गंगाजल से अपने माता-पिता को स्नान कराया और उनका आशीर्वाद लिया। बेटी के इस अनूठे भक्ति भाव और समर्पण को देखकर परिजनों के साथ-साथ पूरे गांव की आंखें नम हो गईं।

पिता की बीमारी ने दिया हौसला, 90 लड़कों के बीच सीखी ड्राइविंग

निशु देशवाल की यह कहानी केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष और स्वावलंबन की मिसाल है। निशु के पिता लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, जिसके कारण घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी थी। परिवार को संकट में देख निशु ने खुद घर की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। उन्होंने न केवल गाड़ियां और पिकअप चलाना सीखा, बल्कि हैवी ड्राइविंग लाइसेंस भी हासिल किया। ड्राइविंग स्कूल में जब उन्होंने दाखिला लिया, तब 90 लड़कों के ट्रेनिंग बैच में वह अकेली लड़की थीं। तमाम सामाजिक बंदिशों को पीछे छोड़ते हुए निशु ने स्टेयरिंग थामा और अपने परिवार का सहारा बनीं।

समाज के लिए बनीं प्रेरणा

आज निशु की यह अनूठी कांवड़ यात्रा और उनका जीवन संघर्ष पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। जींद और आसपास के इलाकों में लोग इस ‘ड्राइवर छोरी’ के जज्बे की खुलकर तारीफ कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निशु ने यह साबित कर दिया है कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं। माता-पिता की सेवा और उनके प्रति समर्पण की जो मिसाल निशु ने पेश की है, वह आज के दौर के युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है।

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