Rider Deeksha Kanwar Yatra: 105 डिग्री बुखार में भी नहीं रुकीं ‘लिटिल राइडर’ दीक्षा, बाइक खराब हुई तो होवर बोर्ड से पूरी की कांवड़ यात्रा

105 डिग्री बुखार में भी नहीं रुकीं 'लिटिल राइडर' दीक्षा, बाइक खराब हुई तो होवर बोर्ड से पूरी की कांवड़ यात्रा
Rider Deeksha Kanwar Yatra: आस्था जब भक्ति में बदलती है तो बड़ी से बड़ी शारीरिक तकलीफें और रास्ते की रुकावटें भी बेअसर साबित होने लगती हैं। हरियाणा के झज्जर जिले में कुछ ऐसा ही अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां ‘लिटिल राइडर’ के नाम से मशहूर दीक्षा ने अपनी कांवड़ यात्रा पूरी कर इतिहास रच दिया। रास्ते में 105 डिग्री के भीषण बुखार से तपते शरीर और अचानक बाइक के धोखा दे जाने के बावजूद दीक्षा के कदम नहीं डगमगाए। उसने होवर बोर्ड का सहारा लिया और कांवड़ को खंडित किए बिना अपनी मंजिल तक पहुंची।
ढोल-नगाड़ों और बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठा पूरा गांव
दीक्षा के गांव की सीमा में प्रवेश करते ही पूरा माहौल शिवमय हो गया। पहले से ही स्वागत में पलकें बिछाए बैठे ग्रामीणों ने डीजे, ढोल-नगाड़ों की थाप पर उसका जोरदार स्वागत किया। जगह-जगह उस पर फूलों की बारिश की गई और ग्रामीणों ने उसे नोटों व फूलों की मालाएं पहनाकर सम्मानित किया। ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय भोलेनाथ’ के गगनभेदी जयकारों से गांव की गलियां गुंजायमान हो उठीं। हर कोई इस छोटी सी कांवड़िया के अडिग हौसले को देखकर हैरान था।
जब बाइक ने छोड़ा साथ, तो होवर बोर्ड बना सहारा
दीक्षा की यह यात्रा चुनौतियों से भरी रही। हरिद्वार से पवित्र जल लेकर लौटते वक्त रास्ते में उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और थर्मामीटर में बुखार 105 डिग्री तक पहुंच गया। इसके बावजूद उसने आराम करने के बजाय चलना जारी रखा। मुसीबत तब और बढ़ गई जब सफर के आखिरी पड़ाव में उसकी बाइक ने भी जवाब दे दिया।
कांवड़ को सुरक्षित गांव तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन चुका था, लेकिन दीक्षा ने हार नहीं मानी। उसने तुरंत अपने होवर बोर्ड (इलेक्ट्रिक सेल्फ-बैलेंसिंग बोर्ड) का इस्तेमाल किया और उसी पर सवार होकर कांवड़ जल लेकर आगे बढ़ चली। सड़क पर होवर बोर्ड पर कांवड़ ले जाती दीक्षा को देखकर रास्ते में मौजूद अन्य श्रद्धालु भी दंग रह गए और तालियां बजाकर उसका हौसला बढ़ाते दिखे।
जलाभिषेक के समय छलक पड़े दीक्षा के आंसू
गांव पहुंचकर दीक्षा ने सीधे स्थानीय शिव मंदिर में प्रवेश किया और भगवान आशुतोष का विधि-विधान के साथ जलाभिषेक किया। पवित्र जल चढ़ाते ही दीक्षा की आंखों से खुशी और भक्ति के आंसू छलक पड़े। पूरे सफर की थकान और दर्द उसके चेहरे पर तैर रही थी, लेकिन मन्नत पूरी होने का सुकून उससे भी बड़ा था। जलाभिषेक के बाद उसने पूरे गांव की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।
दीक्षा का यह जज्बा अब पूरे झज्जर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि दीक्षा की यह कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति और कभी न हार मानने वाले जज्बे की एक जीवंत मिसाल बन गई है।
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