Faridabad News: फरीदाबाद में महाकाल का अद्भुत रूप, मोहब्ताबाद के शिवभक्तों का कांवड़ रथ बना आकर्षण का केंद्र

फरीदाबाद में महाकाल का अद्भुत रूप, मोहब्ताबाद के शिवभक्तों का कांवड़ रथ बना आकर्षण का केंद्र
Faridabad News: धार्मिक आस्था और नवाचार का अनोखा संगम फरीदाबाद की सड़कों पर देखने को मिला, जब गांव मोहब्ताबाद के शिवभक्त हरिद्वार से एक बेहद खास कांवड़ लेकर पहुंचे। पिछले एक दशक से लगातार हरिद्वार से गंगाजल ला रहे इस दल ने इस साल भी अपनी परंपरा को कायम रखा है। 26 सदस्यों वाली इस टीम की खासियत यह है कि यह हर साल अपनी कांवड़ को एक नई और अलग थीम पर तैयार करती है। इस बार कांवड़ रथ पर विराजमान भगवान महाकाल की विशाल और मनमोहक प्रतिमा को देखकर हर कोई भक्तिभाव से भर उठा।
कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार से लेकर फरीदाबाद तक पूरे रास्ते में जहां-जहां से यह रथ गुजरा, वहां महाकाल के दर्शनों के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। शिवभक्तों के इस अनोखे प्रयास को सराहते हुए कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने रास्ते में उनका भव्य स्वागत किया और उन्हें मेडल व ट्रॉफी देकर सम्मानित भी किया। शिवभक्तों का कहना है कि वे केवल कांवड़ नहीं लाते, बल्कि इसके जरिए युवाओं को अपनी प्राचीन सनातन संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों से जोड़ने का एक संदेश भी देते हैं।
केदारनाथ के बाद अब महाकाल का स्वरूप, 5 अगस्त को उठाया था गंगाजल
इस दल का नेतृत्व कर रहे शिवभक्त विक्रम भड़ाना ने बताया कि उनकी 26 लोगों की टीम 5 अगस्त को हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर रवाना हुई थी। उन्होंने बताया कि पिछले साल उनकी टीम ने कांवड़ रथ को केदारनाथ धाम का स्वरूप दिया था, जिसे लोगों ने काफी सराहा था। उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भगवान महाकाल की थीम चुनी गई। भड़ाना के मुताबिक, 11 अगस्त को सभी कांवड़िए गांव के अति प्राचीन व ऐतिहासिक झरना मंदिर में विधि-विधान से भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे।
कांवड़ यात्रा के दौरान मिली व्यवस्थाओं से भी यह दल पूरी तरह संतुष्ट नजर आया। शिवभक्तों ने कहा कि उत्तर प्रदेश से लेकर हरियाणा तक प्रशासनिक इंतजाम काफी मुस्तैद रहे। सड़कों पर शिविरों और सुरक्षा व्यवस्था के कारण यात्रा बिना किसी बाधा के पूरी हुई।
संस्कृति और विरासत को संजोने की अनोखी मुहिम
मोहब्ताबाद के इन शिवभक्तों की सोच सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि आज के आधुनिक दौर में नई पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से दूर होती जा रही है। ऐसे में हर साल एक नई धार्मिक और ऐतिहासिक थीम पर कांवड़ तैयार करने से युवाओं के भीतर अपनी परंपराओं को जानने की उत्सुकता पैदा होती है। हरिद्वार से चलकर फरीदाबाद पहुंचे इस महाकाल रथ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब आस्था के साथ संकल्प जुड़ता है, तो यात्रा यादगार बन जाती है।
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