Rajasthan News: जयपुर एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला, ट्रेनिंग विमान से ग्राउंड वाहन की टक्कर, पायलट-NCC कैडेट सुरक्षित

जयपुर एयरपोर्ट पर ट्रेनिंग विमान से ग्राउंड वाहन की टक्कर
Rajasthan News: जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सोमवार सुबह माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट के साथ ग्राउंड एक्सीडेंट हो गया। करीब 9 बजे विमान को ट्रेनिंग फ्लाइट के लिए पार्किंग एरिया स्थित हैंगर से हवाई पट्टी की ओर ले जाया जा रहा था, इसी दौरान एयरपोर्ट परिसर में चल रहे ग्राउंड हैंडलिंग वाहन ने विमान को टक्कर मार दी। घटना में विमान क्षतिग्रस्त हुआ, लेकिन उसमें बैठे विंग कमांडर पायलट और ट्रेनी NCC कैडेट सुरक्षित रहे।
टक्कर के बाद एयरपोर्ट परिसर में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। संबंधित टीमों ने विमान और वाहन को सुरक्षित किया और घटना की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई।
NCC कैडेट की ट्रेनिंग के लिए जा रहा था विमान
यह माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट NCC कैडेट्स की फ्लाइंग ट्रेनिंग से जुड़ा था। हादसे के वक्त विमान में पायलट के साथ एक ट्रेनी NCC कैडेट भी मौजूद था।
विमान को उड़ान के लिए रनवे की तरफ ले जाया जा रहा था। इसी दौरान ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसी की गाड़ी उसके संपर्क में आ गई। राहत की बात रही कि टक्कर के दौरान विमान हवा में नहीं था और दोनों सवारों को कोई गंभीर चोट नहीं आई।
ग्राउंड वाहन की मूवमेंट पर उठे सवाल
हादसे के बाद एयरपोर्ट के संवेदनशील एप्रन क्षेत्र में ग्राउंड वाहनों की आवाजाही को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। एयरपोर्ट पर विमान और ग्राउंड वाहनों की एक साथ आवाजाही के दौरान दोनों के बीच समन्वय और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का पालन बेहद जरूरी होता है।
प्रारंभिक तौर पर ग्राउंड व्हीकल मैनेजमेंट में चूक की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि दुर्घटना वाहन चालक की गलती, कम्युनिकेशन में कमी या किसी अन्य कारण से हुई। वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
AOCC और सेफ्टी कोऑर्डिनेशन भी जांच के दायरे में
घटना की जांच में यह देखा जा रहा है कि एयरक्राफ्ट की मूवमेंट और ग्राउंड वाहन की आवाजाही एक ही समय में किस तरह हुई। इसके अलावा यह भी जांच का हिस्सा होगा कि दोनों के बीच जरूरी कम्युनिकेशन और सेफ्टी कोऑर्डिनेशन मौजूद था या नहीं।
एयरपोर्ट ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर यानी AOCC की भूमिका और ग्राउंड व्हीकल मैनेजमेंट व्यवस्था की भी समीक्षा की जा सकती है। एयरपोर्ट के एप्रन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विमान की टैक्सींग के दौरान किसी वाहन का रास्ते में आना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर घटना मानी जाती है।
तकनीकी जांच के बाद तय होगी विमान की उड़ान
टक्कर के बाद माइक्रोलाइट विमान को सुरक्षित किया गया है। अब तकनीकी टीम विमान को हुए नुकसान की जांच करेगी। तकनीकी निरीक्षण पूरा होने और विमान को उड़ान के लिए सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही इसकी अगली ट्रेनिंग फ्लाइट को लेकर फैसला होगा।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि हादसे में पायलट और NCC कैडेट सुरक्षित हैं। हालांकि घटना ने जयपुर एयरपोर्ट के एयरसाइड ऑपरेशंस में विमान और ग्राउंड वाहनों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत को सामने ला दिया है।
