राजस्व विभाग की सेवाओं में पारदर्शिता की बड़ी पहल, 11वें दिन ऑटोमेटिक जमाबंदी में शामिल होगा म्यूटेशन (इंतकाल)

Narnaul News: मुख्यमंत्री के सुशासन एवं डिजिटल गवर्नेंस के विज़न को धरातल पर उतारते हुए राज्य सरकार द्वारा राजस्व सेवाओं को सरल, पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था लागू की जा रही है।
उपायुक्त अनुपमा अंजली ने बताया कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल इंतकाल (म्यूटेशन) की कागजी प्रक्रिया में सुधार करना नहीं है, बल्कि आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाना और संपूर्ण राजस्व तंत्र में अधिकारियों व कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना है।
उपायुक्त ने जिला महेंद्रगढ़ में म्यूटेशन कार्यों की स्थिति साझा करते हुए बताया कि जिले में राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त और पारदर्शी बनाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। जिला महेंद्रगढ़ में अब तक कुल 300700 में से 296564 म्यूटेशन (इंतकाल) सफलतापूर्वक दर्ज व स्वीकृत किए जा चुके हैं, जबकि केवल 4136 म्यूटेशन प्रक्रियाधीन अथवा लंबित हैं।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि लंबित मामलों को भी नए ऑटो म्यूटेशन समय-सीमा मॉडल के तहत शीघ्रता से निपटाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जिले का कोई भी नागरिक अपने हक के इंतकाल के लिए परेशान न हो।
उपायुक्त ने आगे बताया कि यदि किसी कारणवश निर्धारित समय-सीमा में म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो नागरिकों के लिए सरकार द्वारा एक विशेष ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल लॉन्च किया जा रहा है। इस पोर्टल पर नागरिक घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और आवश्यक दस्तावेज़ ऑनलाइन अपलोड कर सकेंगे। शिकायत मिलने के 10 दिनों के भीतर संबंधित विभाग या अधिकारी को अनिवार्य रूप से कार्रवाई करनी होगी। यदि म्यूटेशन नियमों के अनुकूल होगा तो नागरिक को म्यूटेशन की प्रति उपलब्ध कराई जाएगी और यदि म्यूटेशन रद्द या अस्वीकृत किया जाता है, तो संबंधित सीआरओ को स्पष्ट स्पीकिंग ऑर्डर जारी करना होगा।
स्पीकिंग ऑर्डर के माध्यम से नागरिक को लिखित में स्पष्ट बताया जाएगा कि उनका म्यूटेशन किस नियम या कारण से रोका गया है तथा आगे की प्रक्रिया क्या होगी। इससे इंतकाल नहीं हो सकता कहकर नागरिक को बिना वजह टालने की परिपाटी पर पूरी तरह अंकुश लगेगा। इसके साथ ही सरकार जमाबंदी में व्यक्ति के हिस्से की जानकारी ऑनलाइन प्रदर्शित करने, छोटी-मोटी त्रुटियों के सरलीकरण और तक्सीम (बंटवारा) जैसी जटिल प्रक्रियाओं को भी पारदर्शी व समयबद्ध बनाने पर जोर दे रही है।
उपायुक्त ने जिले के सभी राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी है कि वे निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन करें। डिजिटलाइजेशन का उद्देश्य कर्मचारियों को परेशान करना नहीं बल्कि सिस्टम को जवाबदेह, पारदर्शी व सुगम बनाना है। यदि शुरुआत में किसी अधिकारी को तकनीकी या व्यावहारिक कठिनाई आती है तो वे अपने सुझाव विभाग को भेज सकते हैं। उन्होंने दोहराया कि तकनीक का मूल उद्देश्य व्यवस्था को जटिल बनाना नहीं, बल्कि आम नागरिक के लिए जीवन व प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।
जिला राजस्व अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति पंजीकरण के लिए सभी तहसीलदारों को दिशा निर्देश दे दिए गए हैं।
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जानिए किसके लॉगिन में कितने-कितने दिन रहेगा इंतकाल
• पहला दिन: पंजीकरण के तुरंत बाद नामांतरण का विवरण स्वचालित रूप से दर्ज हो जाएगा।
• पहला से चौथा दिन: विवरण पटवारी के पास जाएगा, जिन्हें प्रक्रिया पूरी करने के लिए 4 दिन मिलेंगे।
• पांचवां दिन: पटवारी द्वारा कार्यवाही न करने पर मामला स्वतः कानूनगो के पास चला जाएगा।
• छठा से सातवां दिन: कानूनगो को समीक्षा और स्वीकृति के लिए 2 दिन का समय मिलेगा।
• सातवां दिन: कानूनगो द्वारा ध्यान न देने पर मामला स्वचालित रूप से संबंधित तहसीलदार व नायब तहसीलदार के पास हस्तांतरित हो जाएगा।
• आठवां से दसवां दिन: तहसीलदार व नायब तहसीलदार को इस पर निर्णय लेने के लिए 4 दिन दिए जाएंगे।
• ग्यारहवां दिन: यदि तहसीलदार व नायब तहसीलदार भी समय पर कोई निर्णय नहीं लेते हैं, तो नामांतरण स्वतः ही जमाबंदी (मुख्य भूमि रिकॉर्ड) में दर्ज हो जाएगा।
