Yamunanagar News: कलेसर के जंगलों में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, 8 क्विंटल खैर की लकड़ी के साथ गाड़ी जब्त, तस्कर फरार

कलेसर के जंगलों में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, 8 क्विंटल खैर की लकड़ी के साथ गाड़ी जब्त, तस्कर फरार
Yamunanagar News: (रघबीर सिंह) हरियाणा के यमुनानगर जिले से सटे प्रतापनगर क्षेत्र में कलेसर वन्यजीव अभयारण्य (Kalesar Wildlife Sanctuary) की टीम ने देर रात अवैध लकड़ी तस्करों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। रात के सन्नाटे और अंधेरे का फायदा उठाकर बेशकीमती खैर की लकड़ी की तस्करी कर रहे माफिया पर नकेल कसते हुए टीम ने अलसुबह करीब दो बजे आठ क्विंटल खैर से लदी एक गाड़ी को दबोच लिया।
हालांकि, वन विभाग की गाड़ियों की आहट मिलते ही तस्करी में शामिल आरोपी वाहन छोड़कर घने अंधेरे में भागने में कामयाब रहे। विभाग ने जब्त वाहन और लकड़ी को अपने कब्जे में लेकर मामले की जांच और आरोपियों की धरपकड़ तेज कर दी है।
गुप्त सूचना के आधार पर बिछाया गया जाल
कलेसर वन्यजीव विहार की टीम को सटीक गुप्त सूचना मिली थी कि कांसली इलाके से खैर की लकड़ी से भरा एक वाहन किसी दूसरे स्थान पर सप्लाई के लिए निकलने वाला है। सूचना मिलते ही वन विभाग की विशेष टीम हरकत में आई और देर रात ही क्षेत्र में नाकेबंदी कर निगरानी शुरू कर दी गई।
जैसे ही संदिग्ध गाड़ी (रजिस्ट्रेशन नंबर HR-29-AC-2636) कांसली गांव से निकलकर खिल्लांवाला गांव की तरफ बढ़ी, पहले से मुस्तैद टीम ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया। खिल्लांवाला के पास टीम ने घेराबंदी कर गाड़ी को रोक लिया। जब वाहन की तलाशी ली गई तो उसमें से खैर की लकड़ी के 40 गोल-गट्टे (पीस) बरामद हुए, जिनका कुल वजन करीब 8 क्विंटल आंका गया है।
इन तस्करों के नाम आए सामने, तलाश में छापेमारी जारी
प्रारंभिक जांच और स्थानीय इनपुट के आधार पर इस अवैध तस्करी में जाट्टांवाला निवासी तालिब, फुरकान, कुर्बान, मोमिन और मोदी समेत कुछ अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आई है।
अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई के दौरान तस्करों ने रात के घने अंधेरे और आसपास के बीहड़ रास्तों का फायदा उठाया और चकमा देकर भाग निकले। वन्यजीव विहार की टीमें अब इन नामजद आरोपियों के संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं।
मुस्तैदी से नाकाम हुआ तस्करों का प्लान
वन अधिकारियों के अनुसार, खैर की लकड़ी बाजार में काफी कीमती मानी जाती है, जिसके कारण तस्कर अक्सर रात के समय कलेसर के जंगलों और आसपास के इलाकों को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन टीम की समय पर मुस्तैदी के कारण इस बार यह कोशिश नाकाम कर दी गई।
इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने में वन्यजीव विहार के इंस्पेक्टर राजबीर, दरोगा अनुज रावल, छबील दास, सुमित और प्रदीप की सराहनीय भूमिका रही। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले और अवैध लकड़ी माफिया के खिलाफ यह अभियान आगे भी इसी तरह सख्ती से जारी रहेगा।
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