September 3, 2026

Toxic Work Culture: मां अस्पताल में भर्ती, बॉस बोले- ‘महीने की सेल्स क्लोजिंग का क्या?’ वायरल हुई पोस्ट

0
Toxic Work Culture: मां अस्पताल में भर्ती, बॉस बोले- 'महीने की सेल्स क्लोजिंग का क्या?' वायरल हुई पोस्ट

मां अस्पताल में भर्ती, बॉस बोले- 'महीने की सेल्स क्लोजिंग का क्या?' वायरल हुई पोस्ट

Toxic Work Culture: जब परिवार में कोई गंभीर मेडिकल इमरजेंसी आ पड़े और घर का कोई सदस्य अस्पताल के चक्कर काट रहा हो, उस घड़ी में भी अगर कोई बॉस सहानुभूति दिखाने के बजाय केवल काम और बिजनेस टारगेट की रट लगाने लगे, तो इंसान का दिल टूटना स्वाभाविक है।

ऐसा ही एक झकझोर देने वाला वाकया इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी के साथ हुई इस संवेदनहीनता ने भारतीय कॉर्पोरेट जगत के खराब वर्क कल्चर पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रात 3 बजे भेजा मैसेज, डायरेक्टर का जवाब सुन उड़ गए होश

पीड़ित कर्मचारी एक सॉफ्टवेयर कंपनी की सहयोगी संस्था (सब्सिडरी) में बिजनेस डेवलपमेंट एग्जीक्यूटिव के पद पर तैनात है। कर्मचारी ने अपनी आपबीती सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बताया कि कुछ साल पहले ही उसके पिता का देहांत हो चुका है और अब वह अपनी मां की देखभाल खुद करता है। हाल ही में अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण उसे अपनी मां को आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। परिस्थिति बेहद नाजुक थी, इसलिए उसने रात के करीब 3 बजे अपने कंपनी के डायरेक्टर को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर ऑफिस न आ पाने की जानकारी दी।

कर्मचारी को उम्मीद थी कि ऐसे कठिन समय में बॉस की तरफ से कम से कम ढांढस बंधाया जाएगा, लेकिन जवाब ऐसा मिला जिसकी कल्पना भी उसने नहीं की थी।

‘मां का हाल नहीं पूछा, बस पूछा- क्लोजिंग का क्या होगा?’

गंभीर स्थिति को समझने के बजाय डायरेक्टर ने बेहद ठंडे और पेशेवर अंदाज में उल्टा सवाल दाग दिया, “ठीक है, लेकिन इस महीने के क्लोजिंग का क्या होगा?”

पीड़ित कर्मचारी का कहना है कि वह भी एक बिजनेस एग्जीक्यूटिव होने के नाते कंपनी के लक्ष्यों और डेडलाइन का महत्व अच्छी तरह समझता है। लेकिन ऐसे नाजुक मोड़ पर उसने अपने बॉस से कम से कम इतनी उम्मीद जरूर की थी कि वे कहेंगे- ‘पहले मां की सेहत का ख्याल रखो, काम की बातें बाद में होती रहेंगी।’ बॉस के इस संवेदनहीन रवैये ने उसे मानसिक रूप से गहराई तक चोट पहुंचाई।

सैलरी में देरी और वर्क प्लेस का तनाव

कर्मचारी ने अपनी पोस्ट में यह भी खुलासा किया कि उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि और मां की बीमारी के बारे में कंपनी डायरेक्टर को पहले से ही पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद ऐसा व्यवहार किया गया। पीड़ित ने बताया कि कंपनी में पिछले कुछ समय से सैलरी समय पर न मिलना और इंसेंटिव रोक लेना जैसी समस्याएं भी बनी हुई थीं। इस पूरी घटना के बाद उसने सोशल मीडिया यूजर्स से पूछा कि क्या वह इस बात पर जरूरत से ज्यादा भावुक हो रहा है या फिर सच में यह बेहद घटिया और टॉक्सिक वर्क कल्चर की निशानी है?

सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा, कंपनी छोड़ने की मिली सलाह

कर्मचारी की पोस्ट सामने आते ही इंटरनेट पर वायरल हो गई और देखते ही देखते नेटिजन्स का गुस्सा बॉस और कंपनी पर फूट पड़ा। लोगों ने कॉर्पोरेट जगत के इस अमानवीय रवैये की जमकर लानत-मलानत की।

एक यूजर ने गुस्से में लिखा, “इन लोगों ने पैसों के चक्कर में अपनी इंसानियत ही बेच दी है। दुनिया की कोई भी नौकरी परिवार से बढ़कर नहीं हो सकती।” वहीं एक अन्य यूजर ने पीड़ित को सलाह देते हुए कहा, “ऐसी टॉक्सिक और संवेदनहीन कंपनी में एक मिनट भी रुकना बेवकूफी है। तुरंत इस्तीफा दें, भारत में ऐसी कई अच्छी कंपनियां हैं जहां कर्मचारियों के मान-सम्मान और भावनाओं की कद्र की जाती है।”

यह पूरी घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिक कॉर्पोरेट कल्चर में कर्मचारियों को केवल टारगेट पूरा करने वाली मशीन समझा जा रहा है या एक इंसान?

यह भी पढ़ें– Weight loss Truth: 7 दिन में 5 किलो वजन घटाने का दावा! जानिए जापान के 4 मिनट वाले वायरल वर्कआउट का सच

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed