कंगना के अधिकारियों को फटकारने वाले अंदाज पर विक्रमादित्य का पलटवार, बोले- ‘कलम की एक स्याही काफी’

कंगना के अधिकारियों को फटकारने वाले अंदाज पर विक्रमादित्य का पलटवार
Political Update: हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट को लेकर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता एक बार फिर चर्चा में है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनोट पर बिना नाम लिए तंज कसा है। उन्होंने अपने आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में एक पोस्टर साझा किया, जिसमें अधिकारियों को ऊंची आवाज में फटकारने के बजाय कानून की समझ और कलम की ताकत से प्रशासनिक फैसले लेने का संदेश दिया गया है।
विक्रमादित्य सिंह की ओर से साझा पोस्टर में लिखा है, “जिन्हें कलम की ताकत और कानून का इल्म होता है, उन्हें चिल्लाकर अपमान करने की कभी आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि आवाज ऊंची करने से आदेश सख्त नहीं बनते, कलम की एक स्याही ही काफी होती है।” पोस्ट में कंगना का नाम नहीं लिखा गया है, लेकिन इसे शनिवार की मंडी दिशा कमेटी की बैठक में उनके तेवर से जोड़कर देखा जा रहा है।
दिशा कमेटी की बैठक के बाद आया पोस्ट
विक्रमादित्य सिंह का यह पोस्ट शनिवार को मंडी में हुई दिशा कमेटी की बैठक के बाद सामने आया है। बैठक में सांसद कंगना रनोट विकास कार्यों और सांसद निधि से जुड़े मामलों को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगती नजर आई थीं। बैठक के दौरान कंगना ने काम में देरी और अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई थी। इसी दौरान अधिकारियों से सवाल-जवाब करने का उनका अंदाज चर्चा में आ गया।
अधिकारियों को फटकारने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
दिशा कमेटी की बैठक के दौरान कंगना के अधिकारियों को फटकार लगाने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसके बाद उनके व्यवहार और अधिकारियों के साथ बातचीत के तरीके को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने सांसद की भूमिका का हवाला देते हुए अधिकारियों से विकास कार्यों को लेकर जवाब मांगने को उनका अधिकार और जिम्मेदारी बताया। वहीं, आलोचकों ने अधिकारियों से बातचीत के तरीके पर सवाल उठाए।
विक्रमादित्य ने बिना नाम लिए साधा निशाना
इसी घटनाक्रम के बीच विक्रमादित्य सिंह की ओर से पोस्ट साझा किए जाने के बाद मंडी की राजनीति में दोनों नेताओं के बीच अप्रत्यक्ष बयानबाजी फिर चर्चा में आ गई है। पोस्ट में सीधे कंगना रनोट का नाम नहीं है, लेकिन “कलम की ताकत”, “कानून का इल्म” और ऊंची आवाज में आदेश देने जैसे शब्दों को हालिया घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
विक्रमादित्य सिंह और कंगना रनोट के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नई नहीं है। दोनों के बीच सबसे सीधा चुनावी मुकाबला 2024 के मंडी लोकसभा चुनाव में हुआ था, जिसमें कंगना रनोट ने विक्रमादित्य सिंह को हराकर लोकसभा चुनाव जीता था।
‘चिल्लाने से नहीं, फैसलों से चलता है प्रशासन’
विक्रमादित्य सिंह के साझा किए गए पोस्ट का राजनीतिक संदेश प्रशासनिक कामकाज में कानून और फैसलों की ताकत पर जोर देने के रूप में देखा जा रहा है। पोस्ट में यह बात रखी गई है कि किसी अधिकारी पर ऊंची आवाज में नाराजगी जताने से आदेश अपने आप सख्त नहीं हो जाता। हालांकि, पोस्ट में कंगना रनोट का नाम नहीं लिया गया है। इसे उनके हालिया राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पर निशाना मानना राजनीतिक संदर्भ पर आधारित व्याख्या है।
मंडी में दोनों नेताओं की राजनीति का असर स्थानीय मुद्दों पर भी दिखाई देता रहा है। एक ओर सांसद के तौर पर कंगना विकास कार्यों और केंद्र से जुड़े मामलों को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगती हैं, वहीं राज्य सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह कई बार उनके राजनीतिक रुख और काम करने के तरीके पर टिप्पणी कर चुके हैं।
