Rewari : पोस्टरों पर नाम, पर मंच से दूरी, रेवाड़ी मैराथन में नहीं पहुंचे राव इंद्रजीत, मीडिया के सवालों पर साधी सीएम सैनी ने चुप्पी

Rewari : हरियाणा की राजनीति में दक्षिण हरियाणा (अहीरवाल) के बड़े क्षत्रप और केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और भारतीय जनता पार्टी के बीच दूरियां एक बार फिर खुलकर सामने आ गई हैं।
रविवार को रेवाड़ी में आयोजित नशे के खिलाफ मैराथन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिरकत की, लेकिन इस आयोजन से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह पूरी तरह नदारद रहे।
खास बात यह है कि प्रशासन द्वारा जारी बैनरों और पोस्टरों पर सबसे ऊपर उनका नाम मोटे अक्षरों में दर्ज था, इसके बावजूद उन्होंने कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी।
जब पत्रकारों ने इस बाबत मुख्यमंत्री नायब सैनी से सवाल किया कि “जब आप रेवाड़ी आते हैं, तो राव साहब दूर क्यों रहते हैं?” तो मुख्यमंत्री बिना कोई जवाब दिए आगे बढ़ गए। पिछले कुछ समय से अहीरवाल क्षेत्र में यह कोई पहला वाकया नहीं है।
इससे पहले 23 अगस्त और 30 अगस्त को भी रेवाड़ी और बावल में हुए सीएम के कार्यक्रमों से राव इंद्रजीत और उनके समर्थक नदारद रहे थे, हालांकि उन आयोजनों में क्षेत्र के तीनों विधायक—लक्ष्मण यादव, कृष्ण कुमार और अनिल यादव—जरूर मौजूद रहे।
आज की मैराथन में भी ये तीनों विधायक सीएम के साथ नजर आए और सीएम सैनी ने अपने संबोधन में राव तुलाराम का नाम लेकर अहीरवाल को साधने का प्रयास जरूर किया।
आरती राव के तेवरों और गुरुग्राम के बयानों ने गरमाई सियासत
राजनीतिक गलियारों में इस अनबन की सुगबुगाहट तब और तेज हो गई जब कुछ दिन पहले नारनौल में यादव महासभा के कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के तेवर आक्रामक नजर आए।
उन्होंने मंच से खुलकर कहा था कि उनका परिवार हमेशा इस क्षेत्र की आवाज उठाता रहा है और वे सिर कटा सकते हैं लेकिन झुका नहीं सकते। उन्होंने बिना नाम लिए यह भी तंज कसा था कि “आज कुछ लोगों के पेट में राव तुलाराम जी का नाम लेने से भी दर्द होता है।”
इससे पहले 14 अगस्त को गुरुग्राम में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के कार्यक्रम के दौरान राव इंद्रजीत सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के सामने ही बागी तेवर दिखाते हुए कह दिया था कि “सिर्फ पंजाबी होने के नाम पर चुनाव लड़कर देख लें, पता चल जाएगा कितने वोट मिलते हैं।”
उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में सीधा ‘पंजाबी कार्ड’ और राज्य की सत्ता समीकरणों पर चुनौती के रूप में देखा गया था।
कांग्रेस को मिला बैठे-बिठाए बड़ा राजनीतिक मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राव इंद्रजीत सिंह की यह लगातार उपेक्षा पार्टी के लिए सिरदर्द बन सकती है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भी उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर अहीरवाल की अनदेखी का आरोप लगाकर कांग्रेस छोड़ी थी और आत्मसम्मान की खातिर भाजपा का दामन थामा था।
भाजपा में रिकॉर्ड जीत दर्ज करने के बावजूद उन्हें कभी पूर्ण कैबिनेट मंत्री का दर्जा नहीं मिला और मुख्यमंत्री पद की रेस में भी उनकी दावेदारी को लगातार दरकिनार किया गया। अब विपक्ष और कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और भाजपा पर दक्षिण हरियाणा के कद्दावर नेता के अपमान का आरोप लगाने के लिए एक नया हथियार मिल गया है।
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