Amritsar News : अमृतसर में टला बड़ा बंद, लेकिन भंडारी पुल पर दिखा दलित संगठनों का आक्रोश

अमृतसर में टला बड़ा बंद, लेकिन भंडारी पुल पर दिखा दलित संगठनों का आक्रोश
Amritsar News : लुधियाना में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के अपमान को लेकर उपजा रोष शुक्रवार को Amritsar की सड़कों पर साफ दिखाई दिया। पूर्व निर्धारित घोषणा के तहत विभिन्न वाल्मीकि और दलित संगठनों ने ऐतिहासिक भंडारी पुल पर चक्का जाम कर दिया। हालांकि, व्यापारियों के हितों का ध्यान रखते हुए शहर बंद का आह्वान पहले ही वापस ले लिया गया था, लेकिन गुस्से में तपे कार्यकर्ताओं ने पुल पर बैठकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और पुतला भी फूंका।
नारेबाजी के बीच एक घंटे तक थमी रफ्तार
शुक्रवार सुबह शुरू हुए इस प्रदर्शन के दौरान Amritsar में माहौल पूरी तरह गरमाया रहा। सड़क के बीचों-बीच बैठे प्रदर्शनकारियों ने ‘वाल्मीकि शक्ति अमर रहे’ और ‘पंजाब सरकार मुर्दाबाद’ के नारे लगाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। हालांकि यह जाम सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक यानी तीन घंटे के लिए प्रस्तावित किया गया था।
लेकिन हालात और आपसी सहमति के चलते यह प्रदर्शन करीब 11 बजे शुरू हुआ और महज एक घंटे के भीतर ही पुल को यातायात के लिए दोबारा खोल दिया गया। प्रदर्शन के दौरान एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को पूरी तरह मुक्त रखा गया, ताकि मरीजों या तीमारदारों को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
ट्रैफिक व्यवस्था के बीच सड़क पर ही भिड़ पड़े पुलिसकर्मी
Amritsar भंडारी पुल पर लगने वाले जाम से शहर को बचाने के लिए प्रशासन ने पहले ही व्यापक तैयारियां कर रखी थीं। पुल के दोनों तरफ भारी बैरिकेडिंग की गई थी ताकि वाहनों को सुरक्षित रास्तों की तरफ डायवर्ट किया जा सके। इस दौरान एक दिलचस्प और चौंकाने वाला नजारा तब देखने को मिला जब बैरिकेडिंग को लेकर पुलिसकर्मी खुद आपस में ही उलझ पड़े।
मौके पर तैनात एक एएसआई सहकर्मियों को समझाते नजर आए कि यह बैरिकेडिंग एडीसीपी के आदेश पर की गई है, जबकि पीसीआर कर्मी इसे तुरंत हटाने की जिद पर अड़े रहे और कहने लगे कि वे खुद ही जाम संभाल लेंगे। इस आपसी खींचतान ने प्रशासनिक समन्वय की पोल खोल दी।
व्यापारी वर्ग के हितों को दी गई प्राथमिकता
गौरतलब है कि इस घटना के विरोध में पिछले दिनों कई शहरों में पूर्ण बंद देखा गया था। एक दिन पहले ही Amritsar के केंद्रीय वाल्मीकि मंदिर में विभिन्न संगठनों की एक आपात बैठक हुई थी, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि लगातार हो रहे बंद से स्थानीय व्यापारियों और कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी व्यापारिक हित को सर्वोपरि रखते हुए शुक्रवार को अमृतसर शहर को पूरी तरह बंद रखने के फैसले को वापस ले लिया गया था और केवल सांकेतिक चक्का जाम व रोष प्रदर्शन का रास्ता चुना गया।
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