चंडीगढ़ में बंदर ने महिला को नोचा: पैर पर 3 जगह काटा; बच्चों-बुजुर्गों को लेकर डरे लोग, 4 लोगों को काट चुके

चंडीगढ़ में बंदर ने महिला को नोचा
Chandigarh Monkey Attack: चंडीगढ़ में बंदरों के झुंड ने लोगों की मुश्किल बढ़ा दी है। सेक्टर-22बी में शनिवार को एक महिला पर बंदर ने हमला कर दिया और उन्हें बुरी तरह नोच लिया। बंदर ने महिला के पैर पर तीन जगह काटा, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए इंजेक्शन लगवाने पड़े।
स्थानीय लोगों के मुताबिक शहर में अब तक चार लोगों को बंदर काट चुके हैं। लोगों का कहना है कि बंदर अब केवल पेड़ों या खुले इलाकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घरों, छतों और गलियों में भी घूमते रहते हैं।
बच्चों और बुजुर्गों को अकेले भेजने से डर रहे परिवार
स्थानीय लोगों की चिंता केवल बंदरों के हमले तक सीमित नहीं है। लोगों के मुताबिक खाने-पीने का सामान लेकर घर से निकलते ही कई बार बंदर पीछे पड़ जाते हैं। ऐसे में परिवार बच्चों और बुजुर्गों को अकेले घर से बाहर भेजने से भी बच रहे हैं।
बंदरों के झुंड के गलियों और घरों के आसपास घूमने से रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। लोगों को डर रहता है कि अचानक सामने आया बंदर सामान छीनने की कोशिश में हमला न कर दे।
छतों पर लगाए जा रहे लंगूर के कटआउट
बंदरों से बचने के लिए स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर भी तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। कुछ घरों की छतों और दीवारों पर लोगों ने लंगूर की तस्वीरें और कटआउट लगाए हैं।
लोगों का कहना है कि लंगूर की तस्वीर लगाने से बंदर कुछ समय के लिए दूर रहते हैं। हालांकि यह तरीका स्थायी समाधान नहीं है और कुछ समय बाद बंदर फिर उसी इलाके में लौट आते हैं।
लंगूर की आवाज निकालकर भी भगाने की कोशिश
बंदरों को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम पहले भी लंगूर की आवाज निकालने वाले कर्मचारियों की मदद ले चुका है। वर्ष 2024 में नगर निगम ने 4 मिमिकर-कम-रेस्क्यू ऑपरेटर तैनात किए थे।
बाद में इनकी संख्या बढ़ाकर 12 करने की योजना बनाई गई थी। इसका मकसद बंदरों की मौजूदगी वाले इलाकों में उनकी गतिविधियों को नियंत्रित करना और लोगों को राहत देना था।
घरों की छतों तक पहुंच रहे बंदर
स्थानीय लोगों के मुताबिक बंदरों के झुंड अब घरों की छतों तक पहुंच रहे हैं। वे गलियों में भी घूमते हैं और खाने-पीने की चीजें दिखाई देने पर लोगों के पीछे पड़ जाते हैं।
ऐसे हालात में लोगों को अपने घरों की छत और आसपास का हिस्सा भी सुरक्षित रखने की चिंता रहती है। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को अकेले बाहर भेजने में परिवारों को डर लग रहा है।
लोग बोले- घर से निकलना भी मुश्किल
लोगों का कहना है कि बंदरों की समस्या अब केवल असुविधा नहीं रह गई है। महिला के पैर पर तीन जगह काटने की घटना के बाद इलाके में डर और बढ़ गया है।
स्थानीय लोग चाहते हैं कि बंदरों की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि लंगूर के कटआउट या आवाज से कुछ समय के लिए बंदरों को दूर किया जा सकता है, लेकिन बंदरों के लगातार लौटने से स्थायी समाधान नहीं मिल पा रहा है।
