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Sukhbir Singh Badal SIT के सामने पेश नहीं हुए, बहबल कलां गोलीकांड में होनी थी पूछताछ

Sukhbir Singh Badal SIT के सामने पेश नहीं हुए, बहबल कलां गोलीकांड में होनी थी पूछताछ

Sukhbir Singh Badal SIT के सामने पेश नहीं हुए, बहबल कलां गोलीकांड में होनी थी पूछताछ

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hharpreet singh

Sukhbir Singh Badal SIT : बहुचर्चित बहबल कलां गोलीकांड मामले में शिरोमणि अकाली दल के नेता Sukhbir Singh Badal शुक्रवार को विशेष जांच दल (SIT) के समक्ष पेश नहीं हुए। एसआईटी ने उन्हें सुबह 11 बजे चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय तलब किया था, लेकिन तय समय पर वह नहीं पहुंचे।

हालांकि, उनके वकील और सीनियर नेता एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर तथा बंटी रोमाना तय समय से कुछ पहले ही सेक्टर-32 स्थित पुलिस इंस्टीट्यूट पहुंच चुके थे। इस बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और आम आदमी पार्टी के नेता रणबीर सिंह ढीढ़सा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं।

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भाजपा-अकाली समझौते का दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ‘आप’ नेता रणबीर सिंह ढीढ़सा ने दावा किया कि Sukhbir Singh Badal सोची-समझी रणनीति के तहत SIT के सामने पेश नहीं हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और अकाली दल के बीच अंदरखाने कोई समझौता तय हो गया है। ढीढ़सा के मुताबिक, भाजपा की तरफ से उन्हें यह आश्वासन मिला है कि वह जांच में शामिल न हों, क्योंकि पार्टी स्तर पर उन्हें बचा लिया जाएगा। इस खुलासे के बाद से सूबे की सियासत में गर्माहट आ गई है।

क्या है बहबल कलां गोलीकांड का इतिहास?

यह पूरा मामला 14 अक्टूबर 2015 का है, जब फरीदकोट के बहबल कलां में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे सिख श्रद्धालुओं पर पुलिस ने फायरिंग कर दी थी। इस दर्दनाक घटना में दो प्रदर्शनकारियों—कृष्ण भगवान सिंह और गुरजीत सिंह की मौत हो गई थी। उस वक्त पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा की साझा सरकार थी। प्रकाश सिंह बादल सूबे के मुख्यमंत्री थे, जबकि Sukhbir Singh Badal उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ गृह विभाग की कमान भी संभाल रहे थे।

सालों से चल रही है जांच और SIT की सक्रियता

इस सनसनीखेज मामले की तह तक जाने के लिए समय-समय पर कई न्यायिक आयोग और SIT का गठन किया गया, जिनमें जस्टिस जोरा सिंह आयोग और जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्टें काफी चर्चा में रहीं। जांच के दायरे में पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी, पूर्व आईजी परमराज सिंह उमरानंगल और Sukhbir Singh Badal समेत कई बड़े नाम आए।

साल 2026 में आईजी हरजीत सिंह की अगुवाई वाली SIT ने इस मामले की फाइलें फिर से खंगालनी शुरू की हैं। इसी कड़ी में जून में अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने बयान दर्ज कराए, जुलाई में घटनास्थल का दौरा किया गया और 3 सितंबर को भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला भी एसआईटी के सामने पेश हुए थे।

राजनीतिक नफे-नुकसान के अपने समीकरण

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक डॉ. भूपिंदर सिंह का मानना है कि बेअदबी मामले में अकाली दल को जो राजनीतिक नुकसान उठाना था, वह पहले ही हो चुका है और Sukhbir Singh Badal इसके लिए अकाल तख्त के समक्ष सार्वजनिक तौर पर माफी भी मांग चुके हैं। ऐसे में मौजूदा समय में उन्हें पूछताछ के लिए बुलाए जाने को लेकर उनका तर्क है कि यह जनता का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाने का एक हथकंडा भी हो सकता है।

डॉ. सिंह के अनुसार, मौजूदा सरकार इस वक्त कई मोर्चों पर घिरी हुई है और मंत्री हरपाल सिंह चीमा को लेकर भी विपक्ष लगातार सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे नाज़ुक दौर में यदि Sukhbir Singh Badal की गिरफ्तारी जैसी कोई बड़ी कार्रवाई होती है, तो सिख समुदाय और जनता के बीच उनके प्रति सहानुभूति की लहर भी दौड़ सकती है। राजनीतिक नफे-नुकसान के इस गणित को सत्ता पक्ष भी बखूबी समझता है, यही वजह है कि इस पूरी कानूनी प्रक्रिया को फिलहाल लंबा खींचे जाने की संभावना जताई जा रही है।

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