September 16, 2026

Himachal Apple Production: सेब सीजन अंतिम दौर में, फिर भी मंडियों में नहीं पहुंचा 1 करोड़ पेटी; पिछले साल से 44% कम आवक

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Himachal Apple Production: सेब सीजन अंतिम दौर में, फिर भी मंडियों में नहीं पहुंचा 1 करोड़ पेटी; पिछले साल से 44% कम आवक

सेब सीजन अंतिम दौर में

Himachal Apple Production: हिमाचल प्रदेश में इस बार सेब उत्पादन पर मौसम की मार साफ दिखाई दे रही है। सेब सीजन अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है, लेकिन 13 सितंबर तक राज्य की मंडियों में एक करोड़ पेटी सेब भी नहीं पहुंच पाया। बागवानी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस तारीख तक 91 लाख 20 हजार पेटी सेब ही मार्केट में पहुंचा है। पिछले साल 13 सितंबर तक मंडियों में 1 करोड़ 62 लाख पेटी सेब बिक चुका था। इस तरह इस सीजन में अब तक 70 लाख 80 हजार पेटी कम सेब मंडियों में पहुंचा है। पिछले साल की तुलना में यह करीब 44 फीसदी कम मंडी आवक है।

 

 

कम और मध्यम ऊंचाई वाले बागों में ज्यादा नुकसान

इस बार उत्पादन में गिरावट का असर खास तौर पर कम और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों के बागवानों पर पड़ा है। सर्दियों में पर्याप्त बर्फबारी नहीं हुई। इसके बाद मार्च-अप्रैल में फ्लावरिंग के दौरान बारिश और बर्फबारी ने असर डाला।

फ्रूट सेटिंग के समय ठंड और ओलावृष्टि ने भी फसल को नुकसान पहुंचाया। इसके मुकाबले अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर बताई जा रही है। इन इलाकों में अभी भी सेब की तुड़ान चल रही है। इसलिए आने वाले दिनों में मंडियों में और सेब पहुंच सकता है। हालांकि, अभी तक की आवक को देखते हुए इस साल कुल उत्पादन पिछले सीजन से कम रहने की स्थिति बनी हुई है।

इस बार हिमाचल में सेब उत्पादन पिछले डेढ़ दशक के सबसे निचले स्तर तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। वर्ष 2011 में राज्य में करीब 1.38 करोड़ पेटी सेब का उत्पादन हुआ था। यह पिछले 15 वर्षों के कम उत्पादन वाले वर्षों में शामिल रहा है। वहीं, वर्ष 2010 में हिमाचल में रिकॉर्ड 5.11 करोड़ पेटी सेब का उत्पादन हुआ था। इस तुलना से साफ है कि मौसम और उत्पादन की स्थिति के कारण राज्य के सेब कारोबार में कितना बड़ा अंतर आया है।

 

 

2025 में 3.51 करोड़ पेटी उत्पादन, इस बार स्थिति कमजोर

वर्ष 2025 में हिमाचल में करीब 3.51 करोड़ पेटी सेब का उत्पादन हुआ था। उस सीजन में उत्पादन के लिहाज से बागवानों को बेहतर स्थिति मिली थी। इस साल 13 सितंबर तक मंडी आवक काफी कम है। हालांकि, अभी केवल मंडी में पहुंची फसल के आधार पर पूरे सीजन का अंतिम उत्पादन तय नहीं किया जा सकता। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की तुड़ान अभी जारी है और आने वाले दिनों में कुल आवक बढ़ सकती है।

फसल कम होने से बागवानों को उत्पादन का नुकसान जरूर उठाना पड़ा है, लेकिन बाजार में अच्छे दाम मिलने से कुछ राहत भी मिली है। सीजन की शुरुआत में उम्दा क्वालिटी के सेब को 5,000 से 5,500 रुपये प्रति पेटी तक भाव मिला। फिलहाल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तुड़ान जारी है और अच्छी क्वालिटी के सेब को करीब 1,800 से 2,800 रुपये प्रति पेटी तक दाम मिल रहे हैं।

 

 

बागवान बोले- कम फसल की भरपाई कर रहे बेहतर भाव

ठियोग के बागवान महेंद्र वर्मा के मुताबिक, इस साल बागों में फसल काफी कम रही है। उन्हें औसतन 1,800 से 2,800 रुपये प्रति पेटी तक भाव मिल रहा है। उनका कहना है कि कम उत्पादन से नुकसान हुआ है, लेकिन बाजार में मिल रहे बेहतर दाम से नुकसान की कुछ भरपाई हो रही है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तुड़ान पूरी होने के बाद ही इस सीजन की कुल फसल की तस्वीर ज्यादा साफ होगी।

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