US vs India Lifestyle: अमेरिका में करोड़ों के घर, पर सड़कों पर सन्नाटा! NRI के वायरल वीडियो ने छेड़ी तीखी बहस
अमेरिका में करोड़ों के घर, पर सड़कों पर सन्नाटा! NRI के वायरल वीडियो ने छेड़ी तीखी बहस
US vs India Lifestyle: पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका में बसने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए अमरीकी लाइफस्टाइल हमेशा से एक बड़ा सपना रही है। लेकिन क्या बड़ी गाड़ियां और महंगे बंगले उस खालीपन को भर सकते हैं जो वहां के सामाजिक ताने-बाने से गायब है? इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो ने इसी संवेदनशील सवाल को फिर से हवा दे दी है। अमेरिका के विभिन्न राज्यों में बीते 5 सालों से रह रहे एनआरआई (NRI) नितिन मल्होत्रा ने अमेरिकी सबर्बन (उपनगरीय) इलाकों की एक ऐसी जमीनी हकीकत दिखाई है, जिसे अक्सर चमचमाती रील्स और फिल्मों के पीछे छिपा दिया जाता है।
अमरीका का ‘सबर्बन’ सन्नाटा बनाम भारत की जिंदादिली
अपने वीडियो में नितिन अमेरिका की एक रिहायशी सड़क का नजारा दिखाते हैं, जहां शाम के वक्त दूर-दूर तक एक भी इंसान नजर नहीं आता। सड़कों पर पसरी खामोशी को दिखाते हुए वे कहते हैं कि यहां 5 से 15 करोड़ रुपये की कीमत वाले विशाल और आलीशान घर तो मौजूद हैं, लेकिन इन सड़कों पर चहल-पहल पूरी तरह नदारद है।
नितिन इसकी तुलना भारत के आम गली-मोहल्लों से करते हैं, जहां शाम ढलते ही काम से लौटते लोग, पार्कों में खिलखिलाते बच्चे, रेहड़ी-पटरी वालों की आवाजें और पड़ोसियों की गपशप माहौल को जीवंत बना देती हैं। उनका तर्क है कि भारत की इस सामूहिक आबोहवा का मुकाबला अमेरिका का महंगा से महंगा बंगला भी नहीं कर सकता।
‘अगर भारत की सोशल लाइफ के आदी हैं, तो अमरीका में घुट जाएगा दम’
फ्लोरिडा, टेक्सास, कैलिफोर्निया से लेकर न्यू यॉर्क तक का व्यापक अनुभव रखने वाले नितिन का यह सवाल हर उस इंसान को ठहरकर सोचने पर मजबूर कर रहा है जो भारत छोड़कर अमेरिका जाने की होड़ में शामिल है।
उनका मानना है कि अगर कोई व्यक्ति भारतीय समाज की सक्रिय और घुलनशील दिनचर्या का आदी है, तो अमेरिका के शांत और अलग-थलग रिहायशी इलाकों में उसका मन ऊब सकता है। हालांकि, वे यह भी स्वीकार करते हैं कि जिन चुनिंदा इलाकों में भारतीय समुदाय की आबादी ज्यादा है, वहां थोड़ा बहुत माहौल बेहतर रहता है, लेकिन मोटे तौर पर अमेरिकी उपनगरों की यही नीरस सच्चाई है।
प्राइवेसी या अकेलापन? सोशल मीडिया पर दो फाड़ हुए लोग
इस वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर नेटिजन्स दो स्पष्ट धड़ों में बंट गए हैं। एक वर्ग का मानना है कि भारत के लगातार शोर, ट्रैफ़िक और अनियंत्रित भीड़भाड़ से दूर अमेरिका की यह शांति ही असली सुकून है। उनके लिए प्राइवेसी और नियम-कायदे जीवन की सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं।
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वहीं दूसरी तरफ, एक बड़ा वर्ग नितिन के विचारों का समर्थन करते हुए कह रहा है कि अमरीकी शांति समय के साथ एक दीमक की तरह मानसिक अकेलेपन (Isolation) में बदल जाती है, जहां हफ्तों तक पड़ोसियों का चेहरा देखना भी नसीब नहीं होता। अंततः, इस बहस ने एक बार फिर यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जीवन का असली ‘स्टैंडर्ड’ पैसों की चमक में है या अपनों के साथ में?
