September 18, 2026

Haryana Lumpy Virus: हरियाणा में लंपी वायरस का कहर, 9500 के करीब गोवंश संक्रमित, 70 की मौत से मचा हड़कंप

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Haryana Lumpy Virus: हरियाणा में लंपी वायरस का कहर, 9500 के करीब गोवंश संक्रमित, 70 की मौत से मचा हड़कंप

हरियाणा में लंपी वायरस का कहर, 9500 के करीब गोवंश संक्रमित, 70 की मौत से मचा हड़कंप

Haryana Lumpy Virus: हरियाणा के पशुपालकों और गोशाला संचालकों के लिए एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आ रही है। प्रदेश में लंपी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) का संक्रमण तेजी से अपने पांव पसार रहा है।

पशुपालन विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य भर में अब तक 9,480 गोवंश इस संक्रामक बीमारी से प्रभावित पाए गए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि विभाग के तत्पर इलाज से 8,530 पशु पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि वर्तमान में 950 गोवंशों का उपचार अलग-अलग जिलों में चल रहा है। इस खतरनाक वायरस की वजह से प्रदेश में अब तक 70 गोवंशों की मौत दर्ज की जा चुकी है।

कम उम्र और कमजोर पशुओं पर ज्यादा असर, भोपाल लैब से रिपोर्ट का इंतजार

पशुपालन व डेयरी विभाग के निदेशक डॉ. प्रेम सिंह ने स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जिन गोवंशों की इस बीमारी से मृत्यु हुई है, उनमें अधिकांश पहले से किसी अन्य बीमारी से ग्रस्त थे, दुर्घटनाग्रस्त थे या फिर उनकी उम्र चार महीने से कम थी।

स्थिति की वैज्ञानिक जांच के लिए लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार द्वारा लिए गए लगभग 300 नमूनों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है। इसके बावजूद, एहतियात के तौर पर 17 अति-संदिग्ध नमूने भोपाल स्थित ‘राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान’ (NIHSAD) भेजे गए हैं, जिनकी विस्तृत रिपोर्ट आना अभी बाकी है। निदेशक ने पशुपालकों से अपील की है कि जिन बछड़ों की उम्र टीकाकरण के समय 4 महीने से कम थी और अब वे इस सीमा को पार कर चुके हैं, उनका तुरंत नजदीकी केंद्र पर जाकर टीकाकरण कराएं।

1000 अस्पताल और 1800 औषधालय अलर्ट पर, विभाग ने जारी की सख्त गाइडलाइंस

वायरस के फैलाव को रोकने के लिए विभाग ने प्रदेश भर के 1000 पशु अस्पतालों और 1800 औषधालयों के डॉक्टरों व पैरा-मेडिकल स्टाफ को अलर्ट मोड पर रखा है। संक्रमण की रोकथाम के लिए पशुपालकों और गोशाला संचालकों को विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है:

आइसोलेशन अनिवार्य: बीमार पशुओं को तुरंत स्वस्थ मवेशियों से अलग बाड़े में बांधें और उन्हें किसी भी पशु मेले या हाट में न ले जाएं।

परजीवियों पर नियंत्रण: यह विषाणु जनित रोग मक्खी, मच्छर और चिचड़ी के काटने से फैलता है, इसलिए बाड़ों में स्वच्छता रखें और कीटनाशक का छिड़काव करें।

वैज्ञानिक निस्तारण: मृत पशुओं को खुले में फेंकने के बजाय कम से कम 5-6 फीट गहरा गड्ढा खोदकर चूना डालकर दबाएं, ताकि संक्रमण न फैले।

दूध के इस्तेमाल पर सलाह: संक्रमित पशुओं के दाना-पानी के बर्तन अलग रखें। स्वस्थ व टीकाकृत पशुओं का दूध पूरी तरह सुरक्षित है, फिर भी सुरक्षा के लिए दूध को अच्छी तरह उबालकर ही उपयोग में लाएं।

पशु में तेज बुखार, त्वचा पर गांठें बनना, आंख-नाक से पानी गिरना या अचानक दूध उत्पादन घटने जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें। किसी भी आपातकालीन सहायता या परामर्श के लिए किसान विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1962 पर कॉल कर सकते हैं।

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