Petrol Pump UPI: पेट्रोल पंप संचालकों का बड़ा फैसला, राहत नहीं मिली तो बंद होगा गूगल पे और फोनपे, केवल चलेगा कैश
पेट्रोल पंप संचालकों का बड़ा फैसला, राहत नहीं मिली तो बंद होगा गूगल पे और फोनपे, केवल चलेगा कैश
Petrol Pump UPI: केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से अधिक के यूपीआई (UPI) लेन-देन पर ₹5 मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की तैयारी के खिलाफ हरियाणा के पेट्रोल पंप संचालकों ने बगावती तेवर अपना लिए हैं। ‘ऑल हरियाणा पेट्रोलियम डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन’ (AHPDA) ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इस नियम से पेट्रोल पंपों को छूट नहीं दी गई, तो पूरे प्रदेश में डिजिटल पेमेंट पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा और वाहन चालकों से केवल नकद (कैश) भुगतान स्वीकार किया जाएगा।
2017 से नहीं बढ़ा कमीशन, अब ₹5 के कटने से होगा भारी नुकसान
हिसार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजकुमार सलेमगढ़ ने बताया कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर पंप मालिकों का मुनाफा बहुत ही सीमित होता है। एक लीटर डीजल पर महज ₹2 और पेट्रोल पर करीब ₹3 की बचत होती है।
अगर कोई ग्राहक ₹2,100 का तेल यूपीआई से भरवाता है, तो मिलने वाले छोटे से मार्जिन में से ₹5 सीधे एमडीआर के रूप में कट जाएंगे। 2017 के बाद से तेल कंपनियों ने डीलरों के कमीशन में एक पैसे की भी बढ़ोतरी नहीं की है, ऐसे में यह अतिरिक्त बोझ सीधे तौर पर डीलरों के मुनाफे को शून्य कर देगा और उन्हें अपनी जेब से पैसे भरने पड़ेंगे।
गांवों और हाईवे के छोटे पेट्रोल पंपों पर पड़ेगा सबसे बुरा असर
एसोसिएशन का तर्क है कि ग्रामीण इलाकों और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे स्थित छोटे पेट्रोल पंपों की दैनिक बिक्री वैसे ही सीमित होती है। यदि हर बड़े यूपीआई पेमेंट पर ₹5 का नुकसान होने लगा, तो इन छोटे संचालकों के लिए पंप चलाना घाटे का सौदा बन जाएगा। डीलरों ने बताया कि हालांकि यह नियम अभी पूरी तरह से धरातल पर लागू नहीं हुआ है, लेकिन इसके विरोध में 17 सितंबर की दोपहर को ही वित्त मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय को ईमेल के माध्यम से औपचारिक ज्ञापन भेजा जा चुका है।
वित्त मंत्री और पेट्रोलियम मंत्री से लगाई गुहार, ज़ीरो-MDR व्यवस्था बहाल रखने की मांग
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार (पप्पू यादव) द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को भेजे पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पेट्रोल पंप संचालक सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ मुहिम का पूरी तरह समर्थन करते हैं। लेकिन नाममात्र के प्रॉफिट मार्जिन में यह नया शुल्क वहन करना असंभव है।
Dealership की मुख्य मांगों में ₹2,000 से ऊपर के लेन-देन पर ₹5 के एमडीआर से पूरी छूट देना और फ्यूल सेक्टर के लिए पहले से चली आ रही ज़ीरो-MDR (Zero-MDR) व्यवस्था को आगे भी बरकरार रखना शामिल है। Dealerships ने आगाह किया है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो मजबूरन डिजिटल इंडिया के बजाय दोबारा ‘कैश लेनदेन’ की राह पकड़नी पड़ेगी।
