Patti electricity meter dispute : पट्टी में बिना सूचना बदले गए बिजली मीटर, वार्ड नंबर 7 के उपभोक्ताओं ने उठाए सवाल
पट्टी में बिना सूचना बदले गए बिजली मीटर, वार्ड नंबर 7 के उपभोक्ताओं ने उठाए सवाल
Patti electricity meter dispute : पट्टी शहर के वार्ड नंबर 7 में इन दिनों बिजली विभाग की कार्रवाई चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। क्षेत्रवासियों ने विभाग के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि घरों के बाहर लगे पुराने बिजली मीटरों को बिना किसी पूर्व सूचना के चुपचाप बदल दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब उनके घरों के मीटर उतारे जा रहे थे, तब न तो उन्हें मौके पर बुलाया गया और न ही मीटर की अंतिम रीडिंग या अन्य जरूरी विवरण दर्ज करने की औपचारिकता पूरी की गई।
उपभोक्ताओं के आरोप और अनभिज्ञता
वार्ड के निवासियों का कहना है कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनके पुराने मीटर क्यों उतारे जा रहे हैं और उन्हें कहां जमा कराया जाएगा। कई उपभोक्ताओं को तो तब पता चला जब उनके घर के बाहर नया मीटर लग चुका था।
लोगों का तर्क है कि बिजली कनेक्शन उपभोक्ता से सीधे जुड़ा एक अहम मामला है, इसलिए इस तरह की कार्रवाई से पहले विभाग को कम से कम सूचना तो देनी ही चाहिए थी। पुराने मीटर अपने साथ ले जाने के बाद आगे की प्रक्रिया को लेकर भी कोई स्पष्टता नहीं दी गई है।
विभागीय अधिकारियों के दावे और विरोधाभास
दूसरी ओर, जब इस पूरे मामले पर विभाग के अधिकारियों से पक्ष जाना गया, तो उन्होंने इन आरोपों को खारिज कर दिया। अधिकारियों का दावा है कि उपभोक्ताओं से विधिवत हस्ताक्षर करवाने के बाद ही नए मीटर लगाने की प्रक्रिया को पूरा किया गया था।
हालांकि, मौके पर मौजूद उपभोक्ताओं ने अधिकारियों के इस दावे को सिरे से नकार दिया है। उनका साफ कहना है कि किसी भी उपभोक्ता से न तो कोई हस्ताक्षर लिए गए और न ही उन्हें भरोसे में लिया गया। अधिकारियों और उपभोक्ताओं के इन आमने-सामने के बयानों ने पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बना दिया है।
बिलों में गड़बड़ी और जुर्माने का डर
मीटर अचानक बदले जाने के कारण अब क्षेत्रवासियों के मन में भविष्य के बिजली बिलों और संभावित जुर्माने को लेकर चिंता सताने लगी है। उपभोक्ताओं का डर है कि यदि पुराने मीटर की अंतिम रीडिंग और नए मीटर की शुरुआती रीडिंग में कोई फेरबदल हुआ, तो उसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ सकता है।
इसी आशंका के चलते स्थानीय लोगों ने मांग की है कि विभाग बदले गए सभी मीटरों का रिकॉर्ड, अंतिम रीडिंग और हस्ताक्षरों की सूची सार्वजनिक करे ताकि किसी भी तरह के विवाद की गुंजाइश न बचे।
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