Kurukshetra Ganpati Visarjan: ज्योतिसर में नरवाना नहर पर गणपति विसर्जन शुरू, गोताखोर प्रगट सिंह बने रक्षक
ज्योतिसर में नरवाना नहर पर गणपति विसर्जन शुरू, गोताखोर प्रगट सिंह बने रक्षक
Kurukshetra Ganpati Visarjan: (पवन शर्मा)। ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के भक्तिमय जयघोष और ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ रविवार को ज्योतिसर क्षेत्र में गणपति विसर्जन का दौर शुरू हो गया। अपने-अपने घरों और पूजा पंडालों में स्थापित बप्पा की प्रतिमाओं को लेकर श्रद्धालु ज्योतिसर के पास से गुजर रही नरवाना ब्रांच नहर (Narwana Branch Canal Jyotisar) पर पहुंचे।
जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती के बाद प्रतिमाओं को जल प्रवाहित किया गया। विसर्जन के दौरान किसी भी तरह के संभावित हादसे को टालने के लिए हर साल की तरह इस बार भी मशहूर गोताखोर प्रगट सिंह और उनकी समर्पित टीम ने नहर किनारे सुरक्षा का मोर्चा संभाल लिया।
बिना सरकारी मदद के निष्काम सेवा, नहर किनारे बांधी गई रस्सियां
प्रगट सिंह और (Diver Pragat Singh Kurukshetra) उनकी टीम के सदस्य सुबह से ही नरवाना ब्रांच नहर के घाटों पर मुस्तैद दिखे। सुरक्षा के लिहाज से टीम ने नहर किनारे मजबूत रस्सियां बांध रखी थीं ताकि कोई भी श्रद्धालु अनजाने में फिसलकर गहरे पानी में न चला जाए। टीम के सदस्य श्रद्धालुओं से सम्मानपूर्वक गणपति की मूर्तियां खुद प्राप्त कर रहे हैं और उन्हें नहर के सुरक्षित हिस्सों में विसर्जित कर रहे हैं।
गोताखोर प्रगट सिंह ने बताया कि वे पिछले कई सालों से गणपति उत्सव के अंतिम तीन-चार दिनों तक बिना नागा ज्योतिसर नहर पर डेरा जमाए रखते हैं। इस पूरे अभियान में उन्हें किसी भी सरकारी तंत्र या प्रशासनिक कोष से कोई मदद नहीं मिलती; वे और उनके साथी पूरी तरह निष्काम और सेवा भाव से यह काम करते हैं।
भावुकता में गहरे पानी में उतरते हैं लोग, प्रगट सिंह की सजगता से टलते हैं हादसे
प्रगट सिंह ने जमीनी अनुभव साझा करते हुए बताया कि बप्पा को विदाई देते वक्त कई बार श्रद्धालु बेहद भावुक हो जाते हैं। इसी भावुकता में वे खुद प्रतिमा लेकर नहर के बीचों-बीच उतरने की जिद करने लगते हैं।
नरवाना नहर में पानी का बहाव बेहद तेज होता है (Ganpati Visarjan Safety Haryana) और गहराई भी ज्यादा है, जिससे जरा सी चूक बड़े हादसे में बदल सकती है। इसी खतरे को देखते हुए गोताखोरों की टीम श्रद्धालुओं को किनारे पर ही रोक देती है और खुद पानी में उतरकर विसर्जन की प्रक्रिया पूरी कराती है। बीते वर्षों में यह टीम कई डूबते हुए लोगों को समय रहते निकालकर नई जिंदगी दे चुकी है।
श्रद्धालुओं ने मुक्त कंठ से की सराहना
रविवार को अपने परिवार के साथ (Jyotisar Tourist Spot) बप्पा को विदाई देने पहुंचे दर्जनों श्रद्धालुओं ने गोताखोर प्रगट सिंह और उनके साथियों के इस सेवा कार्य की जमकर तारीफ की। श्रद्धालुओं का कहना था कि धार्मिक आस्था के इस पावन मौके पर सुरक्षा सबसे पहला पैमाना होना चाहिए। प्रशासन की मौजूदगी हो या न हो, प्रगट सिंह की टीम जिस मुस्तैदी से लोगों की जानमाल की रक्षा कर रही है, वह पूरे कुरुक्षेत्र के लिए एक मिसाल है।
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