Mahendragarh : हकेवि में आईसीएसएसआर प्रायोजित दस दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम का हुआ समापन
Mahendragarh : हकेवि में आईसीएसएसआर प्रायोजित दस दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम का हुआ समापन
Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के मनोविज्ञान विभाग द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) के प्रायोजन में आयोजित दस दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम का सफल समापन हुआ।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय में आयोजित समापन समारोह में हकेवि के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार मुख्य अतिथि तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. उर्मी नंदा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। इस दस दिवसीय अकादमिक कार्यक्रम का उद्देश्य उभरते शोधकर्ताओं की शोध अभिरुचि, शोध पद्धतिगत दक्षता, विश्लेषणात्मक कौशल एवं अकादमिक लेखन क्षमता को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम के लिए देशभर से 350 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 30 प्रतिभागियों का चयन किया गया।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. टंकेशवर कुमार ने शोध पद्धति पाठ्यक्रम के आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि अकादमिक ज्ञान के विस्तार तथा समकालीन सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए शोध का कठोर, नैतिक एवं सामाजिक रूप से प्रासंगिक होना आवश्यक है।
उन्होंने प्रतिभागियों का आह्वान किया कि वे पाठ्यक्रम के दौरान अर्जित ज्ञान एवं कौशल का उपयोग अपने भावी शोध कार्यों में करें और गुणवत्तापूर्ण शोध के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के विकास में योगदान दें।

समापन सत्र में डॉ. उर्मी नंदा ने सार्थक एवं प्रभावी शोध के लिए शोध पद्धति में स्पष्टता, आलोचनात्मक चिंतन तथा अकादमिक ईमानदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को शोध प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं अकादमिक नैतिकता का पालन करने के लिए प्रेरित किया।
हकेवि में मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष एवं पाठ्यक्रम निदेशक प्रो. डॉ. विश्वा चौधरी ने विश्वविद्यालय प्रशासन एवं आईसीएसएसआर द्वारा प्रदान किए गए सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी विषय विशेषज्ञों, आयोजन टीम एवं प्रतिभागियों का भी धन्यवाद किया।
पाठ्यक्रम के सह-निदेशक एवं मनोविज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. प्रदीप कुमार ने कार्यक्रम के आयोजन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दस दिवसीय पाठ्यक्रम में 17 प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों ने विभिन्न शोध पद्धतियों एवं तकनीकों पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।
अकादमिक सत्रों में शोध समस्या का निर्धारण, शोध प्रस्ताव तैयार करना, साहित्य समीक्षा, बिब्लियोमेट्रिक विश्लेषण, गुणात्मक शोध, मनोमिति, मनोवैज्ञानिक परीक्षण, परिकल्पना परीक्षण, पैरामीट्रिक एवं नॉन-पैरामीट्रिक तकनीकें, प्रतिगमन विश्लेषण, विषय-वस्तु विश्लेषण, थीमैटिक विश्लेषण, नृवंशविज्ञान, प्रायोगिक अभिकल्प तथा मिश्रित-पद्धति शोध सहित विभिन्न विषयों को शामिल किया गया। समापन समारोह के दौरान प्रतिभागियों को पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण करने एवं सक्रिय सहभागिता के लिए प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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