Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में फार्म महिलाओं और एसएचजी के लिए विटामिन-डी युक्त खाद्य उत्पादों पर विशेष प्रशिक्षण संपन्न
Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में फार्म महिलाओं और एसएचजी के लिए विटामिन-डी युक्त खाद्य उत्पादों पर विशेष प्रशिक्षण संपन्न
Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ द्वारा हरियाणा राज्य विज्ञान, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (एचएससीएसआईटी), हरियाणा द्वारा वित्तपोषित परियोजना के अंतर्गत फार्म महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए ’विटामिन-डी संवर्धित खाद्य उत्पाद’ विषय पर उद्यमिता उन्मुख व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, महेंद्रगढ़ के सहयोग से किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य विश्वविद्यालय में किए जा रहे शोध को ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाते हुए फार्म महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूहों को पौष्टिक एवं मूल्यवर्धित विटामिन-डी युक्त खाद्य उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक कौशल प्रदान करना था।
प्रशिक्षण के दौरान अनुसंधान टीम ने लाभार्थियों को विटामिन-डी संवर्धित खाद्य उत्पाद तैयार करने की व्यावहारिक जानकारी एवं प्रशिक्षण दिया। डॉ. अनिता कुमारी एवं उनके पीएच.डी. शोधार्थियों निकिता, डेजी तथा वैशाली ने महेंद्रगढ़ जिले की लाभार्थी महिलाओं को ’न्यूट्री-बार एवं पिन्नी’ जैसे विटामिन-डी संवर्धित खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण एवं निर्माण का प्रदर्शन किया। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को खाद्य उत्पादों की तैयारी, प्रसंस्करण तथा मूल्यवर्धन की प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया।
हकेवि के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ग्रामीण समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए शोध एवं नवाचार को समाज तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने परियोजना दलकृडॉ. अनिता कुमारी, प्रो. नीलम सांगवान एवं प्रो. सुरेंद्र सिंहकृके प्रयोगशाला आधारित शोध को सामाजिक उपयोग एवं सतत आजीविका सृजन से जोड़ने के निरंतर प्रयासों की सराहना की।
विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि कौशल आधारित ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं की उद्यमिता क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ उनके लिए सतत आजीविका के अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने कहा कि इस प्रकार का व्यावहारिक प्रशिक्षण महिला लाभार्थियों में उपयोगी कौशल विकसित करेगा और ’’आत्मनिर्भर भारत’’ की दिशा में एक सार्थक कदम है।
परियोजना की प्रधान अन्वेषक डॉ. अनिता कुमारी ने शोध दल एवं कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयकों डॉ. एन.के. यादव तथा डॉ. पूनम यादव के साथ मिलकर तकनीकी प्रदर्शन एवं व्यावहारिक गतिविधियों का समन्वय किया। इस पहल के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी को प्रयोगशाला से समुदाय तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम को हरियाणा सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्तपोषित परियोजना के अंतर्गत सहयोग प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम में फार्म महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी रही। पोषण जीवविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश तथा स्कूल ऑफ इंटरडिसिप्लिनरी एंड एप्लाइड साइंसेज के अधिष्ठाता प्रो. पवन कुमार मौर्य ने महिला सशक्तिकरण, पोषण-संवेदी नवाचार, उद्यमिता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं सामुदायिक विकास की दिशा में इस पहल को महत्वपूर्ण बताया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय के शोध एवं नवाचार को ग्रामीण महिलाओं की व्यावहारिक आवश्यकताओं से जोड़ने के साथ-साथ पोषण, कौशल विकास, महिला उद्यमिता एवं सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किया गया।
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