Stubble Management Punjab : पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 90% की आई गिरावट, सरकार ने तेज किया अभियान
पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 90% की आई गिरावट, सरकार ने तेज किया अभियान
Stubble Management Punjab : पंजाब में धान की कटाई के साथ ही पराली प्रबंधन का मुद्दा एक बार फिर गरमाने लगा है, लेकिन इस बार राज्य सरकार और प्रशासन ने शुरुआत से ही मोर्चा संभाल लिया है। पराली जलाने के खिलाफ जागरूकता की अनूठी मिसाल पेश करते हुए पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने गुरदासपुर जिले के बटाला स्थित गांव पुरियां खुर्द का रुख किया।
एक किसान के खेत में पहुंचे कृषि मंत्री ने खुद बेलर मशीन वाले ट्रैक्टर पर सवार होकर धान की पराली की गांठें (बेल्ज) तैयार कीं। इस साहसिक और व्यावहारिक पहल के जरिए उन्होंने साफ संदेश दिया कि खेतों में आग लगाने की पुरानी परिपाटी को अब अलविदा कहने का वक्त आ गया है, क्योंकि पराली कचरा नहीं बल्कि एक बेहद उपयोगी संसाधन है।
पराली प्रबंधन के लिए मिल रही है भारी सब्सिडी
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) को लेकर कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सरकार इसके लिए करोड़ों रुपये की वित्तीय सहायता दे रही है। कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि वर्ष 2026-27 के लिए 576 करोड़ रुपये की बड़ी कार्य योजना तैयार की गई है।
इसके तहत व्यक्तिगत तौर पर किसानों को सीआरएम मशीनें खरीदने के लिए 50 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। वहीं, कस्टम हायरिंग सेंटरों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सहकारी सभाओं और ग्राम पंचायतों को यह मशीनरी उपलब्ध कराने के लिए 80 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी मुहैया कराई जा रही है, ताकि छोटे किसान भी आसानी से इनका लाभ उठा सकें।
मामलों में 90 प्रतिशत की आई भारी गिरावट
सरकारी आंकड़ों और नीतियों के जमीन पर असर की बात करें तो इसके नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे हैं। साल 2022 में जहां पंजाब में पराली जलाने के कुल 49,922 मामले सामने आए थे, वहीं साल 2025 में यह आंकड़ा लुढ़ककर महज 5,114 पर आ गया। सीधे शब्दों में कहें तो पराली जलाने की घटनाओं में पूरे 90 प्रतिशत की ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है।
इस शानदार उपलब्धि के चलते न केवल पंजाब के पर्यावरण को सांस लेने की राहत मिली है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राज्य की फसल अवशेष प्रबंधन रणनीति को बड़ी मान्यता और सराहना मिली है।
मिट्टी और पर्यावरण बचाने की साझा जिम्मेदारी
खेत में किसानों के बीच मौजूद रहे गुरमीत सिंह खुड्डियां ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पराली जलाने से न केवल जमीन की उर्वरक शक्ति यानी उपजाऊ क्षमता नष्ट होती है, बल्कि हवा भी इस कदर जहरीली हो जाती है कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए सांस लेना मुहाल हो जाता है।
उन्होंने किसानों से हाथ जोड़कर अपील की कि वे प्रशासनिक पाबंदियों या सिर्फ डर से नहीं, बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ियों की सेहत और मिट्टी की रक्षा के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं। कृषि मंत्री ने अंत में कहा कि सरकार किसानों को हरसंभव तकनीकी और आर्थिक मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है, बशर्ते हर नागरिक और किसान इस मुहिम में अपना पूरा सहयोग दे।
