Karnal FPO Innovation: मंडी में दाम गिरे तो न हों परेशान! नीलोखेड़ी FPO ने खोजा सब्जियों को 10 गुना मुनाफे में बदलने का तरीका
मंडी में दाम गिरे तो न हों परेशान! नीलोखेड़ी FPO ने खोजा सब्जियों को 10 गुना मुनाफे में बदलने का तरीका
Karnal FPO Innovation: हरियाणा के करनाल जिले और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सब्जियों की पैदावार होती है। अक्सर आवक बढ़ते ही प्याज, करेला, टमाटर और भिंडी जैसी सब्जियों (Karnal Agriculture News) के मंडी भाव कौड़ियों के दाम आ जाते हैं। खेत से मंडी तक ले जाने का भाड़ा भी न निकलने पर किसान फसल को सड़कों पर फेंकने या खेत में जोतने को मजबूर हो जाते हैं।
किसानों की इसी पुरानी और दर्दनाक समस्या का समाधान तलाशते हुए नीलोखेड़ी फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (Vegetable Processing Unit) ने एक अनूठी पहल की है। एफपीओ ने डिहाइड्रेशन तकनीक के जरिए सब्जियों को सुखाकर लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उन्हें नया बाजार देने का सफल मॉडल (FPO Success Story Haryana) तैयार किया है।
प्याज और करेले के बाद अब ड्राई भिंडी बाजार में उतरने को तैयार
नीलोखेड़ी एफपीओ ने इस अभिनव प्रयोग की शुरुआत सबसे पहले प्याज की स्लाइस को डिहाइड्रेट करके की थी। इसके बाद करेले को सुखाकर तैयार किया गया, जिसे बाजार में बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। (Dehydrated Okra Bitter Gourd) अब इसी कड़ी में एफपीओ ड्राई भिंडी को बाजार में उतारने जा रहा है। एफपीओ का मुख्य उद्देश्य किसानों को केवल कच्ची सब्जी का विक्रेता बनाकर रखने के बजाय उन्हें ‘वैल्यू एडिशन’ से जोड़ना है, ताकि सही समय पर सही दाम (Farmer Income Double) मिल सके।
ताजी सब्जी के मुकाबले 8 से 10 गुना तक मुनाफे का दावा, विदेशी बाजारों पर नजर
एफपीओ के अग्रणी किसान सरदार सिंह के मुताबिक, जब मंडी में सब्जियों के दाम गिर जाते हैं, तब किसान इस मशीन के जरिए अपनी उपज को सुखाकर सुरक्षित रख सकते हैं। प्रक्रिया पर आने वाली लागत निकालने के बावजूद ड्राई सब्जियों को प्रोसेसिंग के बाद बेचने पर किसानों को सामान्य ताजी फसल के मुकाबले 8 से 10 गुना तक अधिक मुनाफा मिल सकता है। एफपीओ अब इन डिहाइड्रेटेड सब्जियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक्सपोर्ट करने की दिशा में भी निर्यातकों से बात कर रहा है।
35 हजार से 50 लाख तक की मशीनें, छोटे-बड़े सभी किसानों के लिए विकल्प
तकनीक को हर वर्ग के किसान की पहुंच में लाने के लिए अलग-अलग क्षमता के डिहाइड्रेटर मॉडल तैयार किए गए हैं। करीब 35 हजार रुपये की लागत वाली छोटी मशीन में किसान खुद सब्जियों की धुलाई कर उन्हें सुखा सकता है। वहीं, 50 लाख रुपये की लागत वाले बड़े कमर्शियल यूनिट को 4 से 5 किसान मिलकर या समूह के रूप में लगा सकते हैं। बड़े यूनिट में सफाई, धुलाई, कटाई और डिहाइड्रेशन से लेकर पैकिंग तक का पूरा काम ऑटोमैटिक तरीके से होता है।
तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार से सब्सिडी की मांग
सरदार सिंह ने बताया कि फिलहाल इस तकनीक या मशीनरी पर सरकार की तरफ से कोई सीधी सब्सिडी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग उठाई है कि अगर इस डिहाइड्रेशन तकनीक और प्रोसेसिंग यूनिट्स पर किसानों को वित्तीय मदद व सब्सिडी दी जाए, (Agriculture Value Addition) तो बड़ी संख्या में किसान इस मॉडल को अपनाएंगे। इससे न केवल मंडी में मंदी के समय होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा, बल्कि कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण से गांव स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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