Festival flight ticket prices: त्योहारी सीजन में महंगा होगा हवाई सफर! सरकार नहीं तय करेगी किरायों की सीमा, जानिए वजह
त्योहारी सीजन में महंगा होगा हवाई सफर! सरकार नहीं तय करेगी किरायों की सीमा
Festival flight ticket prices: त्योहारों के मौसम में अपनों से मिलने की उम्मीद लगाए हवाई यात्रियों की जेब पर इस बार बड़ा बोझ पड़ सकता है। आने वाले त्योहारी महीनों के दौरान हवाई किराये में जोरदार बढ़ोतरी के आसार हैं, लेकिन सरकार एयरलाइन कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए किसी भी तरह की प्राइस कैपिंग (किराये की अधिकतम सीमा) लागू करने के मूड में नहीं है। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने मंगलवार को यह साफ कर दिया कि सरकार बाजार आधारित प्रतिस्पर्धी दरों में सीधा हस्तक्षेप नहीं करेगी, हालांकि एयरलाइंस से आग्रह किया जाएगा कि वे आम यात्रियों की सुविधा को देखते हुए किराये को संतुलित रखें।
‘उड़ान’ योजना के कार्यक्रम में मंत्री ने जताई नीतिगत स्थिति
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने वाली ‘उड़ान’ (UDAN) योजना के अगले चरण के समझौतों पर हस्ताक्षर के अवसर पर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि मंत्रालय त्योहारी सीजन और प्रमुख आयोजनों के दौरान हवाई किरायों की पल-पल की स्थिति पर नजर रखता है। उन्होंने कहा, “हम एयरलाइन कंपनियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। उनसे हमारा स्पष्ट कहना है कि त्योहारों के इस संवेदनशील समय में किराये उचित स्तर पर रखे जाएं ताकि अपने घर जाने वाले आम यात्रियों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ न पड़े।”
पश्चिम एशिया संकट और ATF की महंगाई बढ़ा रही विमान कंपनियों की लागत
इस बार केवल त्योहारों की भारी मांग ही किराये बढ़ाने का एकमात्र कारण नहीं है, बल्कि वैश्विक परिस्थितियां भी हवाई यात्रा को महंगा बना रही हैं। उड्डयन मंत्री के मुताबिक, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल और विमान ईंधन (एविएशन टर्बाइन फ्यूल – ATF) के दामों में उछाल आया है। किसी भी एयरलाइन के कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट (परिचालन खर्च) में अकेले एटीएफ की हिस्सेदारी करीब 40 से 43 प्रतिशत होती है। ऐसे में ईंधन के दामों में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी का सीधा असर फ्लाइट टिकटों की कीमतों पर दिखाई देने लगता है।
मांग और लागत के भरोसे रहेगा मार्केट, सरकार करेगी निगरानी
सरकार की ओर से किराये की ऊपरी सीमा तय न करने का सीधा मतलब यह है कि एयरलाइंस अपनी मांग, रूट की व्यस्तता और ईंधन लागत के हिसाब से डायनेमिक प्राइसिंग लागू करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगी। हालांकि, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि वे स्थिति पर नजर बनाए रखेंगे ताकि कंपनियां किसी भी स्थिति में अनुचित मुनाफाखोरी न कर सकें और यात्रियों को त्योहारी सीजन में सुरक्षित व सुलभ सफर मिल सके।
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