हिमाचल के फार्मा हब की 63 दवाओं के सैंपल फेल, कंपनियों को नोटिस जारी करते हुए स्टॉक वापस मंगाया
हिमाचल में बनी 63 दवाओं के सैंपल फेल
Medicine quality check: हिमाचल प्रदेश के फार्मा उद्योग से जुड़ी दवाओं को लेकर अगस्त के ड्रग अलर्ट में बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी CDSCO की गुणवत्ता जांच में हिमाचल में निर्मित 63 दवाओं के सैंपल निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। देशभर की फार्मा कंपनियों से लिए गए नमूनों की जांच में कुल 221 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें हिमाचल की दवाओं की संख्या सबसे अधिक बताई गई है। इससे राज्य के बड़े फार्मा हब में बनने वाली दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। फेल हुए उत्पादों में अलग-अलग बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इनमें बच्चों के सिरप से लेकर एंटीबायोटिक, हार्ट, बुखार, खांसी, पेट, किडनी और आंखों से संबंधित दवाएं शामिल हैं। इसके अलावा कुछ इंजेक्शन और विटामिन उत्पाद भी गुणवत्ता जांच में असफल पाए गए हैं।
ड्रग अलर्ट में शामिल दवाओं के नमूनों की जांच अलग-अलग सरकारी प्रयोगशालाओं में की गई। उपलहिमाचल के फार्मा हब की 63 दवाओं के सैंपल फेल, कंपनियों को नोटिस और स्टॉक वापस मंगायाब्ध जानकारी के अनुसार 191 दवाओं के सैंपल स्टेट ड्रग टेस्टिंग लेबोरेट्रीज में जांचे गए, जबकि 29 नमूनों की जांच केंद्रीय प्रयोगशालाओं में हुई। गुणवत्ता जांच में किसी दवा का सैंपल फेल होने का मतलब है कि संबंधित बैच का नमूना तय गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं कर पाया। ऐसे मामलों में नियामक एजेंसियां संबंधित कंपनी और उत्पाद के बैच की आगे जांच करती हैं और जरूरत के मुताबिक बिक्री रोकने तथा बाजार से स्टॉक वापस मंगाने जैसी कार्रवाई करती हैं।
बद्दी से लेकर कालाअंब और पांवटा साहिब तक की फैक्ट्रियां
हिमाचल में जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, वे राज्य के अलग-अलग फार्मा उत्पादन केंद्रों में बनी हैं। इनमें बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड और दवनी जैसे औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा में स्थित दवा इकाइयों में निर्मित उत्पाद भी फेल सैंपलों में शामिल बताए गए हैं। हिमाचल का सोलन जिले का बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र देश के प्रमुख फार्मा उत्पादन केंद्रों में गिना जाता है, इसलिए यहां बनने वाली दवाओं की गुणवत्ता का सीधा संबंध बड़े बाजार और मरीजों तक पहुंचने वाले उत्पादों से है।
अगस्त के ड्रग अलर्ट में हिमाचल के अलावा देश के कई अन्य राज्यों में निर्मित दवाओं के सैंपल भी गुणवत्ता जांच में फेल हुए हैं। उत्तराखंड की 39 और गुजरात की 17 दवाओं के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। महाराष्ट्र की 16, मध्य प्रदेश की 12 और तमिलनाडु तथा हरियाणा की 11-11 दवाएं भी फेल सैंपलों में शामिल हैं। सिक्किम और उत्तर प्रदेश की 9-9 दवाओं के साथ पंजाब में बनी 8 दवाओं के नमूने भी जांच में असफल पाए गए। इन आंकड़ों से साफ है कि गुणवत्ता से जुड़ी समस्या केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। अलग-अलग राज्यों में निर्मित दवाओं के नमूनों की नियमित जांच के जरिए नियामक एजेंसियां ऐसे उत्पादों की पहचान करती हैं जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते।
कंपनियों को नोटिस, फेल बैचों की बिक्री पर रोक
हिमाचल के स्टेट ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर के अनुसार, जिन कंपनियों के दवाओं के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल हुए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित कंपनियों से जवाब मांगा गया है और नियमों के तहत आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। फेल पाए गए संबंधित बैचों की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। अधिकारियों के अनुसार कंपनियों की ओर से बाजार में भेजे गए स्टॉक को वापस मंगाने के निर्देश दिए गए हैं। अब संबंधित कंपनियों के जवाब और नियामकीय जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। दवाओं के फेल सैंपल सामने आने के बाद सबसे अहम सवाल यही है कि संबंधित बैच बाजार में कितनी मात्रा में पहुंचा और उसे कितनी तेजी से वापस लिया जा रहा है।
