September 24, 2026

शेयर बाजार में भूचाल: सेंसेक्स 1248 अंक गिरा, PB Fintech समेत फाइनेंशियल शेयरों में तेज बिकवाली

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शेयर बाजार में भूचाल: सेंसेक्स 1248 अंक गिरा, PB Fintech समेत फाइनेंशियल शेयरों में तेज बिकवाली

सेंसेक्स 1248 और निफ्टी 384 अंक गिरा

Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 24 सितंबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 1,248 अंक यानी 1.67% गिरकर 73,581 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 384 अंक यानी 1.64% टूटकर 23,063.10 पर आ गया। बाजार में बैंकिंग, फाइनेंशियल, मेटल और ऑटो शेयरों पर खासा दबाव रहा। सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। गिरावट के पीछे वैश्विक बाजार से मिले कमजोर संकेतों के साथ अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी प्रमुख कारण रहे। इसके अलावा भारत में इंश्योरेंस सेक्टर के नियमों में प्रस्तावित बदलाव ने फाइनेंशियल शेयरों की बिकवाली बढ़ा दी। दिन के कारोबार में निफ्टी पहली बार 11 जून के बाद 23,100 के नीचे गया। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 2.2%, निफ्टी मेटल 1.9% और निफ्टी बैंक 1.7% गिरा।

 

 

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5.11% पहुंची, निवेशकों की चिंता बढ़ी

बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल से आया। अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.11% पहुंच गई। यह 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। गुरुवार की तेजी में एक ही दिन में करीब 15 बेसिस पॉइंट का उछाल आया। बॉन्ड यील्ड का मतलब सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न है। जब बाजार में बॉन्ड की कीमत गिरती है तो उसकी यील्ड बढ़ती है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने का सीधा असर दुनियाभर के निवेश पर पड़ता है, क्योंकि अमेरिकी सरकारी बॉन्ड को वैश्विक निवेश में एक प्रमुख सुरक्षित विकल्प माना जाता है। जब अमेरिका में बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है तो उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण कुछ कम हो सकता है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक भारत जैसे बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी परिसंपत्तियों की तरफ रुख कर सकते हैं। इससे भारतीय शेयरों और रुपये पर दबाव बढ़ता है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी भारतीय बाजार की चिंता बढ़ाई। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता दिखा और दिन के दौरान यह करीब 105 डॉलर तक पहुंच गया। तेल की कीमत भारत के लिए इसलिए अहम है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। कच्चा तेल महंगा होने पर भारत का आयात बिल बढ़ता है। इसका असर रुपये पर दबाव, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। मौजूदा तेजी के पीछे मिडिल ईस्ट में तनाव और तेल की सप्लाई को लेकर चिंता भी एक कारण है। ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी आशंकाओं के कारण बाजार तेल की उपलब्धता और कीमतों पर नजर बनाए हुए है।

 

 

IRDAI के प्रस्तावित बदलाव से इंश्योरेंस शेयरों में बिकवाली

शेयर बाजार की गिरावट में घरेलू स्तर पर इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़ी खबर ने भी दबाव बढ़ाया। IRDAI ने इंश्योरेंस कंपनियों के खर्च और कमीशन से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। बाजार में आशंका बनी कि नए नियमों से कुछ कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स की कमाई प्रभावित हो सकती है। इसका असर इंश्योरेंस और फाइनेंशियल शेयरों पर साफ दिखाई दिया। PB Fintech में तेज गिरावट आई। बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व और एक्सिस बैंक समेत कई वित्तीय शेयर भी दबाव में रहे। Moneycontrol के मुताबिक, 12 प्रमुख फाइनेंशियल शेयरों के मार्केट कैप में कारोबार के दौरान करीब 1.12 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। इसमें बजाज फाइनेंस, PB Fintech और HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों का भी योगदान रहा।

शेयर बाजार में तेज बिकवाली का सीधा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 4 लाख करोड़ रुपये घट गया। बाजार में लगातार बिकवाली से निवेशकों के पोर्टफोलियो पर दबाव आया। खासकर बैंकिंग, फाइनेंशियल और इंश्योरेंस शेयरों में गिरावट ने बड़े स्तर पर मार्केट वैल्यू को प्रभावित किया। रुपये पर भी दबाव रहा। भारतीय मुद्रा गुरुवार को डॉलर के मुकाबले 22 पैसे कमजोर होकर 95.96 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गई। बुधवार को यह 95.74 रुपये पर बंद हुई थी।

 

 

गिरते बाजार में निवेशकों को क्या करना चाहिए?

बाजार में तेज गिरावट देखकर घबराहट में तुरंत शेयर बेचने के बजाय निवेशकों के लिए अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करना जरूरी है। खासकर जिन शेयरों में सिर्फ बाजार की वजह से गिरावट आई है और जिनकी कंपनी की वित्तीय स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, उनमें स्थिति अलग हो सकती है। वहीं, किसी शेयर में सिर्फ इसलिए खरीदारी करना भी उचित नहीं है कि उसकी कीमत गिर गई है। कंपनी की कमाई, कर्ज, वैल्यूएशन और कारोबार की संभावनाओं को देखकर ही निवेश का फैसला करना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए रोजाना के उतार-चढ़ाव की बजाय अपने वित्तीय लक्ष्य और निवेश अवधि को ध्यान में रखना ज्यादा जरूरी है। जरूरत पड़ने पर पोर्टफोलियो में एसेट एलोकेशन की समीक्षा की जा सकती है।

शेयर बाजार में गिरावट के बीच गुरुवार को दो IPO भी सब्सक्रिप्शन के लिए खुले। Moneyview और A-One Steels India के IPO में निवेशक 28 सितंबर तक बोली लगा सकते हैं। Moneyview का IPO करीब 1,091.61 करोड़ रुपये का है। इसका प्राइस बैंड 32 से 34 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। पहले दिन कारोबार के दौरान इश्यू को निवेशकों से शुरुआती प्रतिक्रिया मिली। A-One Steels India का IPO 405 करोड़ रुपये का है। इसका प्राइस बैंड 385 से 405 रुपये प्रति शेयर है और इश्यू 28 सितंबर को बंद होगा। पहले दिन दोपहर तक इसे करीब 20% सब्सक्रिप्शन मिल चुका था। ऐसे समय में IPO में निवेश करने वालों को भी बाजार की मौजूदा अस्थिरता को ध्यान में रखना होगा। IPO की मांग या ग्रे मार्केट प्रीमियम भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता।

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