September 25, 2026

Jalandhar Private Hospital Negligence : जालंधर के निजी अस्पताल में महिला और नवजात की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

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Jalandhar Private Hospital Negligence : जालंधर के निजी अस्पताल में महिला और नवजात की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

जालंधर के निजी अस्पताल में महिला और नवजात की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

Jalandhar Private Hospital Negligence : शादी के नौ बरस बाद जिस आंगन में किलकारियां गूंजने वाली थीं, वहां अचानक चीख-पुकार पसर गई। जालंधर कैंट स्थित निजी अस्पताल में कथित चिकित्सीय लापरवाही के कारण एक गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु की मौत हो गई। घटना के बाद बदहवास परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने अस्पताल के बाहर जमकर हंगामा किया। गुस्साए लोगों ने दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी और अस्पताल को सील करने की मांग को लेकर पुलिस प्रशासन के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

सामान्य प्रसव का भरोसा देकर शुरू हुआ लापरवाही का खेल

पीड़ित परिवार के सदस्यों ने बताया कि महिला को शाम के वक्त सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) के लिए अस्पताल लाया गया था। दाखिले के समय डॉक्टरों ने मरीज को पूरी तरह दुरुस्त बताते हुए कहा था कि सभी मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट सामान्य हैं और घबराने की कोई बात नहीं है। सब कुछ ठीक चलने का दिलासा देने के कुछ ही देर बाद अस्पताल में गुपचुप हलचल शुरू हुई।

परिजनों का आरोप है कि उन्हें बिना कोई जानकारी दिए या स्थिति की गंभीरता बताए, मरीज को आनन-फानन में एम्बुलेंस में डाला गया और शहर के दूसरे निजी संस्थान (जोल अस्पताल) भेज दिया गया।

‘अपनी गलती छिपाने के लिए मृत शरीर को ही रेफर कर दिया’

जब अनहोनी की आशंका से घबराए परिजन एम्बुलेंस के पीछे-पीछे जोल अस्पताल पहुंचे, तो वहां के डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि महिला और उसके नवजात बच्चे की काफी समय पहले ही मौत हो चुकी है।

परिजन का सीधा आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने अपनी जानलेवा चूक और लापरवाही को छिपाने के लिए मृत शरीर को ही दूसरे अस्पताल ट्रांसफर कर दिया, ताकि वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ सकें और मामला उनके सिर न मढ़े।

35 हजार रुपये लौटाने की पेशकश से भड़का परिजनों का गुस्सा

हादसे के बाद जब आक्रोशित परिजन सवाल पूछने वापस अस्पताल पहुंचे, तो वहां का रवैया बेहद संवेदनहीन मिला। परिजनों के मुताबिक, न तो डॉक्टरों के चेहरों पर किसी प्रकार का पछतावा था और न ही अस्पताल कर्मचारियों के व्यवहार में कोई दुख।

उल्टे, परिजनों को शांत कराने के लिए उनसे जमा कराए गए 35,000 रुपये वापस ले जाने की बात कही गई। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने पीड़ित परिवार और ग्रामीणों के गुस्से को और भड़का दिया।

पुलिस ने रिकॉर्ड कब्जे में लिया, कार्रवाई तक अंतिम संस्कार से इनकार

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस और एसएचओ (SHO) दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अस्पताल का एंट्री रजिस्टर, मरीज की मेडिकल फाइलें और अन्य संबंधित दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। वहीं, गमगीन परिजनों ने दो टूक कहा है कि जब तक दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त मामला दर्ज कर अस्पताल को सील नहीं किया जाता, तब तक वे शवों का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इस पूरे मामले में जब अस्पताल प्रशासन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कैमरे या मीडिया के सामने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया।

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