Narnaul : नारनौल में धूमधाम से संपन्न हुआ गणपति विसर्जन, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ दी गई बप्पा को विदाई
Narnaul : नारनौल में धूमधाम से संपन्न हुआ गणपति विसर्जन, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ दी गई बप्पा को विदाई
Narnaul : नारनौल शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गणेश चतुर्थी के पावन पर्व के समापन पर शुक्रवार को गणपति विसर्जन का आयोजन अत्यंत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ किया गया।
शहर के विभिन्न हिस्सों में करीब 30 स्थानों पर भव्य पंडाल सजाकर भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। सुबह से ही श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और शाम ढलते ही ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी व नाच-गाकर गणपति बप्पा को नम आंखों से विदाई दी। इस दौरान शहर के बाजारों और मुख्य मार्गों पर निकली शोभायात्राओं में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

विसर्जन से पूर्व शहर के विभिन्न पंडालों से भव्य झांकियां निकाली गईं। श्रद्धालु गणेश जी की प्रतिमाओं को फूलों से सजे वाहनों में विराजमान कर शोभायात्रा के रूप में विसर्जन स्थलों तक पहुंचे। रास्ते भर युवाओं और महिलाओं ने रंग-गुलाल उड़ाते हुए “गणपति बाप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों से वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
पुरानी सराय और तालाब क्षेत्रों में उमड़ी भीड़
पुरानी सराय क्षेत्र स्थित शिव बगीची, राम सिंह चौक और छाबड़ा वाली गली के अलावा नई सराय के माता सती मंदिर और शिव नगर स्थित शिव मंदिर (मीरा जी) में स्थापित गणेश मूर्तियों की शोभायात्रा निकाली गई। इसके अतिरिक्त सत्यनारायण मंदिर और छोटा तालाब क्षेत्र में मुख्य रूप से बनाए गए पंडालों से भी विसर्जन यात्राएं निकाली गईं।
प्रशासनिक व्यवस्थाओं और परंपरा के तहत मुख्य रूप से छोटा तालाब और बड़ा तालाब में प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। वहीं, जल संरक्षण और भीड़ प्रबंधन के चलते कुछ स्थानों पर विशेष तौर पर गड्ढे खोदकर उनमें पानी भरकर गणेश प्रतिमाओं का विधिवत विसर्जन किया गया।

ग्रामीण अंचल में भी दिखा गजब का उत्साह
गणेश विसर्जन का यह धार्मिक अनुष्ठान केवल शहरी सीमा तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के गांवों में भी ग्रामीणों ने पूरी श्रद्धा के साथ गणपति को विदाई दी। सीहमा गांव में एडवोकेट हेमंत शर्मा सहित तमाम ग्रामीणों ने मिलकर गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया।
विसर्जन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारों का आयोजन किया गया, जिसमें प्रसाद ग्रहण करने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं।
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