September 26, 2026

Rewari : रेवाड़ी के सरकारी स्कूलों में घट रहे छात्र, 5 साल में 12 हजार से अधिक बच्चों ने छोड़े स्कूल

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Rewari : रेवाड़ी के सरकारी स्कूलों में घट रहे छात्र, 5 साल में 12 हजार से अधिक बच्चों ने छोड़े स्कूल

प्रतीकात्मक फोटो

Rewari : हरियाणा के रेवाड़ी जिले के सरकारी स्कूलों से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। यहां के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार गिरती जा रही है। कोरोना काल के दौरान जो छात्र संख्या बढ़कर 66,432 तक पहुंच गई थी, वह अब घटकर मात्र 54 हजार के आसपास सिमट गई है।

यानी पिछले पांच वर्षों के भीतर सरकारी स्कूलों से 12 हजार से अधिक बच्चों ने दूरी बना ली है। हालात यह हैं कि इस शैक्षणिक सत्र में भी पिछले साल के मुकाबले करीब 2 हजार दाखिले कम दर्ज किए गए हैं, जबकि नौवीं से 12वीं कक्षा तक दाखिले की अंतिम तिथि भी 31 अगस्त को समाप्त हो चुकी है।

साल-दर-साल इस प्रकार घटती गई विद्यार्थियों की संख्या

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद से सरकारी स्कूलों में बच्चों के एडमिशन का ग्राफ लगातार नीचे आ रहा है:

  • वर्ष 2022: 66,432 विद्यार्थी

  • वर्ष 2023: 60,562 विद्यार्थी

  • वर्ष 2024: 58,253 विद्यार्थी

  • वर्ष 2025: 56,000 विद्यार्थी

  • वर्ष 2026: करीब 54,000 विद्यार्थी

इन आंकड़ों साफ जाहिर होता है कि पांच साल के अंतराल में कुल 12,432 विद्यार्थियों की भारी कमी दर्ज की गई है।

दाखिला अभियानों और लाखों के खर्च के बावजूद नहीं थमी गिरावट

सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग हर साल बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाता है। इसके तहत शिक्षकों को घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क करने और सरकारी स्कूलों में मिलने वाली मुफ्त सुविधाओं के बारे में बताने के निर्देश दिए जाते हैं।

गांवों में रैलियां निकालकर भी लोगों को प्रेरित किया जाता है, जिस पर हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं। इसके बावजूद धरातल पर आंकड़ों में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।

अभिभावकों की क्या है मुख्य चिंता?

अभिभावकों का मानना है कि आज भी कई सरकारी स्कूलों में स्टाफ की भारी कमी है। इसके अलावा अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई का अभाव और मूलभूत सुविधाओं की सुस्त स्थिति लोगों को अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में करवाने के लिए मजबूर कर रही है।

कई जगहों पर स्थिति यह है कि एक ही शिक्षक को एक से अधिक कक्षाओं का जिम्मा संभालना पड़ता है। अभिभावकों का कहना है कि यदि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं को पूरी तरह दुरुस्त किया जाए, तभी आम जनता का भरोसा इन स्कूलों पर फिर से कायम हो सकेगा।

शिक्षा विभाग का पक्ष: सुविधाओं का लगातार हो रहा विस्तार

दूसरी ओर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप दहिया का कहना है कि पहले के मुकाबले अब सरकारी स्कूलों में सुविधाओं का दायरा काफी बढ़ा है।

शिक्षकों की कमी को भी काफी हद तक दूर कर लिया गया है और वर्तमान में सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या न के बराबर रह गई है। विभाग की तरफ से ग्रामीणों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है और सत्र की शुरुआत में ही शिक्षक घर-घर जाकर बच्चों के एडमिशन के लिए प्रयास करते हैं।

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