फॉर्म-6 विवाद पर कांग्रेस की सुप्रीम कोर्ट से मांग, ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराने की अपील
फॉर्म-6 विवाद पर कांग्रेस की सुप्रीम कोर्ट से मांग
SIR Controversy: मतदाता पंजीकरण के ऑनलाइन फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर निर्वाचन आयोग और कांग्रेस के बीच विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में तत्काल स्वतः संज्ञान लेने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराने की मांग की। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि आयोग ने पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया में ऐसा प्रावधान जोड़ा है, जिसके लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि आयोग ने अधिकारियों को युवा मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन शिविर लगाने और सोशल मीडिया के जरिए उनका व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया है। हालांकि, उनके मुताबिक, दूसरी ओर ऑनलाइन फॉर्म में जोड़ी गई नई जानकारी युवाओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को मुश्किल बना सकती है।
यह विवाद फॉर्म-6 में एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी जानकारी मांगे जाने को लेकर है। फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है। कांग्रेस का आरोप है कि इस फॉर्म के ऑनलाइन संस्करण में आवेदकों से उनके माता-पिता या दादा-दादी के पिछले एसआईआर में शामिल होने की जानकारी मांगी जा रही है।
जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट से की हस्तक्षेप की मांग
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में संवैधानिक परंपराओं और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का उल्लंघन हुआ है। रमेश ने निर्वाचन आयोग पर फॉर्म-6 में एकतरफा बदलाव करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि आयोग के पास इस तरह का बदलाव करने का अधिकार नहीं है और इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि जुलाई 2026 की शुरुआत में ऑनलाइन फॉर्म में बिना किसी आधिकारिक अधिसूचना के नया खंड जोड़ा गया।
कांग्रेस का कहना है कि इस बदलाव का असर खासकर उन युवाओं पर पड़ सकता है, जो पहली बार मतदाता के रूप में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर रहे हैं। पार्टी के मुताबिक, जिन आवेदकों के माता-पिता या दादा-दादी का पुरानी मतदाता सूची में नाम दर्ज होने की जानकारी उपलब्ध नहीं है, उन्हें आवेदन करते समय परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
फॉर्म-6 में क्या जानकारी मांगी जा रही है?
फॉर्म-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। विवाद की वजह ऑनलाइन फॉर्म के साथ जोड़ा गया वह घोषणा-पत्र है, जिसमें आवेदक से पूछा जाता है कि उसका या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में शामिल था या नहीं। इस जानकारी के आधार पर आवेदक को संबंधित विकल्प चुनना होता है। कुछ मामलों में पुरानी मतदाता सूची से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी भी मांगी जाती है। रिपोर्टों के मुताबिक, ऑनलाइन पोर्टल पर यह खंड अनिवार्य के रूप में चिह्नित नहीं था, लेकिन इसे भरे बिना आवेदन जमा नहीं हो पा रहा था। कांग्रेस ने इसी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का तर्क है कि नए मतदाता के पंजीकरण के लिए जरूरी जानकारी और अतिरिक्त एसआईआर घोषणा-पत्र के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए। खासकर ऐसे युवाओं के लिए यह प्रक्रिया चुनौती बन सकती है, जिन्हें अपने परिवार के पुराने मतदाता रिकॉर्ड की जानकारी नहीं है।
कांग्रेस ने नियमों में संशोधन नहीं होने का उठाया मुद्दा
जयराम रमेश ने ‘पंजीकरण निर्वाचक नियम, 1960’ का हवाला देते हुए कहा कि फॉर्म-6 में बदलाव करने के लिए नियमों में जरूरी संशोधन किया जाना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने इस प्रक्रिया का पालन किए बिना ऑनलाइन फॉर्म में नया खंड जोड़ दिया। कांग्रेस के मुताबिक, फॉर्म में इस तरह का बदलाव केवल प्रशासनिक निर्देश या ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी बदलाव करके नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित नियमों में संशोधन और संसद को इसकी सूचना देने की प्रक्रिया जरूरी है। रमेश ने आरोप लगाया कि आयोग ने इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। उनके मुताबिक, निर्वाचन आयुक्तों ने इसे ‘अवैध और अनधिकृत’ बताते हुए वापस लेने की मांग की थी, ताकि युवा और पहली बार मतदाता बनने वाले लोगों को पंजीकरण में परेशानी न हो।
निर्वाचन आयोग ने कहा- फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं
इस विवाद पर निर्वाचन आयोग ने 24 सितंबर को सफाई देते हुए कहा था कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग के मुताबिक, एसआईआर से संबंधित जानकारी के लिए मौजूदा फॉर्म के साथ एक अलग घोषणा-पत्र जोड़ा गया है। आयोग ने इसे मूल फॉर्म में संशोधन के बजाय अतिरिक्त घोषणा-पत्र की व्यवस्था बताया है। आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि एसआईआर से जुड़ा घोषणा-पत्र पहले जारी किए गए निर्देशों के तहत शामिल किया गया था। इसके बाद 25 सितंबर को सामने आई रिपोर्टों में आयोग के सूत्रों के हवाले से कहा गया कि एसआईआर से जुड़े आदेशों को तीनों निर्वाचन आयुक्तों ने मंजूरी दी थी। इस तरह विवाद का एक प्रमुख पहलू यह है कि ऑनलाइन पोर्टल पर दिखाई देने वाले अतिरिक्त घोषणा-पत्र को मूल फॉर्म में बदलाव माना जाए या एसआईआर के तहत अलग से मांगी गई जानकारी। कांग्रेस इसे नियमों के उल्लंघन का मामला बता रही है, जबकि निर्वाचन आयोग का कहना है कि फॉर्म-6 में बदलाव नहीं किया गया है।
दो निर्वाचन आयुक्तों की आपत्ति से बढ़ा विवाद
फॉर्म-6 से जुड़ा विवाद उस समय और चर्चा में आया, जब दो निर्वाचन आयुक्तों की ओर से इस व्यवस्था पर आपत्ति किए जाने की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने ऑनलाइन फॉर्म में एसआईआर से संबंधित जानकारी जोड़ने के तरीके पर सवाल उठाए थे। आपत्तियों में यह मुद्दा भी शामिल था कि क्या इस तरह की जानकारी लेने के लिए नियमों में औपचारिक संशोधन जरूरी था। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने इस व्यवस्था को वापस लेने की मांग की थी। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने बाद में कहा कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है और अतिरिक्त घोषणा-पत्र एसआईआर के तहत लागू किया गया है। इस मामले में आयोग की सफाई और दोनों निर्वाचन आयुक्तों की कथित आपत्तियों के बीच कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस ने इसी विवाद को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है।
कांग्रेस का कहना है कि फॉर्म-6 के साथ जोड़ी गई अतिरिक्त जानकारी पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। पार्टी के मुताबिक, कई युवा अपने माता-पिता या दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड की जानकारी नहीं रखते। ऐसे में उनसे पिछली एसआईआर सूची से जुड़ी जानकारी मांगना पंजीकरण की प्रक्रिया को कठिन बना सकता है। फॉर्म-6 के जरिए नए मतदाता अपना नाम सूची में दर्ज कराने के लिए आवेदन करते हैं। ऐसे में आवेदन प्रक्रिया में अतिरिक्त जानकारी की जरूरत और उसे उपलब्ध कराने की व्यावहारिक कठिनाइयों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस व्यवस्था के वास्तविक प्रभाव और इसके कानूनी आधार पर अंतिम स्थिति संबंधित नियमों और आयोग के निर्देशों के संदर्भ में तय होगी। कांग्रेस ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जवाबदेही तय करने की बात कही है। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है और अतिरिक्त घोषणा-पत्र एसआईआर के तहत लागू किया गया है।
