सब्जियों को ताजा दिखाने के लिए रंगीन लाइट लगाई तो होगा चालान, चंडीगढ़ निगम का प्रस्ताव
चंडीगढ़ में सब्जी वेंडरों पर सख्ती की तैयारी
Vegetable Market Challan: चंडीगढ़ की सब्जी मंडियों में अब रंगीन लाइटों के सहारे सब्जियों और फलों को ताजा दिखाना वेंडरों को भारी पड़ सकता है। नगर निगम ने ऐसी लाइटों का इस्तेमाल करने वाले वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए निगम की मंडी से जुड़ी कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे अक्टूबर में होने वाली हाउस मीटिंग में पेश किया जाएगा। प्रस्ताव के तहत सब्जियों और फलों पर हरी, पीली, लाल या दूसरी रंगीन लाइटें लगाने वाले वेंडरों के चालान किए जाएंगे। नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस पर भी कार्रवाई होगी। तीन बार चालान होने पर संबंधित वेंडर का लाइसेंस छह महीने के लिए सस्पेंड करने का प्रावधान प्रस्तावित है। नगर निगम की कमेटी का कहना है कि बाजार में आने वाले लोग पैसे देकर ताजी और साफ-सुथरी सब्जियां खरीदते हैं। लेकिन कुछ वेंडर रंगीन लाइटों का इस्तेमाल करके खराब या कम ताजी सब्जियों और फलों को भी बेहतर दिखाते हैं। इससे ग्राहक को दुकान पर दिखाई देने वाली सब्जी और घर पहुंचने के बाद उसकी असली हालत में अंतर मिल सकता है।
नगर निगम की मंडी से जुड़ी कमेटी के सदस्य और पार्षद गुरप्रीत गाबी ने रंगीन लाइटों के इस्तेमाल पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि लोग बाजार में अच्छी और ताजी सब्जियां खरीदने के लिए जाते हैं, लेकिन कुछ वेंडर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग रंगों की लाइटें लगाते हैं। गाबी के मुताबिक, सब्जियों पर हरी लाइट और फलों पर पीली या लाल लाइट का इस्तेमाल किया जाता है। इन लाइटों के कारण सब्जियां और फल देखने में ज्यादा ताजे और आकर्षक लगते हैं। ग्राहक दुकान पर उनकी वास्तविक स्थिति का सही अंदाजा नहीं लगा पाते और कई बार उन्हें खराब या पीली पड़ चुकी सब्जियां भी ताजी दिखाई देती हैं। ऐसे में ग्राहक पैसे खर्च करके जो सामान घर ले जाता है, उसकी गुणवत्ता दुकान पर दिखाई गई गुणवत्ता से अलग हो सकती है। गाबी ने इसे ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, लोगों के खाने-पीने से जुड़ी चीजों में इस तरह की गड़बड़ी को रोकना जरूरी है।
तीन बार चालान होने पर छह महीने के लिए लाइसेंस होगा सस्पेंड
नगर निगम की कमेटी ने नियमों का उल्लंघन करने वाले वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए चालान व्यवस्था तैयार की है। इसके तहत रंगीन लाइटों के इस्तेमाल सहित प्रस्ताव में शामिल नियमों को तोड़ने पर वेंडरों का चालान किया जाएगा। बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। प्रस्ताव के अनुसार, किसी वेंडर के तीन बार चालान होने पर उसका लाइसेंस छह महीने के लिए सस्पेंड किया जा सकेगा। इससे नियमों का लगातार उल्लंघन करने वाले वेंडरों को मंडी में कारोबार करने से अस्थायी रूप से रोका जा सकेगा। हालांकि, यह व्यवस्था नगर निगम की हाउस मीटिंग और प्रशासन की मंजूरी के बाद ही लागू हो सकेगी। कमेटी ने वेंडरों की पहचान और उनके रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने की भी योजना बनाई है। इसके तहत वेंडरों के आईडी कार्ड में उनके परिवार का विवरण और पूरा पता दर्ज किया जाएगा। इससे संबंधित वेंडर की पहचान और उसके पते की जानकारी निगम के रिकॉर्ड में उपलब्ध रहेगी।
रंगीन लाइटों के इस्तेमाल के अलावा मंडियों में सफाई व्यवस्था भी निगम की कमेटी के एजेंडे में शामिल है। पार्षद गुरप्रीत गाबी के मुताबिक, कुछ वेंडर कारोबार खत्म होने के बाद प्लास्टिक बैग और दूसरी गंदगी मंडियों में छोड़कर चले जाते हैं। इससे मंडियों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होती है और ग्राहकों को भी परेशानी होती है। सब्जी मंडियों में रोजाना बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं। ऐसे में वहां साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है। प्लास्टिक बैग और अन्य कचरा इधर-उधर फेंकने से बाजार में गंदगी फैलती है। निगम की कमेटी का प्रस्ताव वेंडरों की जवाबदेही तय करने और मंडियों में व्यवस्था सुधारने से भी जुड़ा है। प्रस्ताव में चालान की व्यवस्था के जरिए नियमों का पालन सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है। हालांकि, किन-किन उल्लंघनों पर कितनी कार्रवाई होगी, इसका अंतिम स्वरूप निगम की मंजूरी के बाद स्पष्ट होगा।
स्थानीय किसानों को मंडी फीस में मिलेगी 50 प्रतिशत छूट
नगर निगम की कमेटी ने वेंडरों के लिए नियम बनाने के साथ स्थानीय किसानों को राहत देने का प्रस्ताव भी तैयार किया है। इसके तहत चंडीगढ़ की मंडियों में अपनी उपज बेचने वाले पात्र स्थानीय किसानों को मंडी फीस में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इस छूट का लाभ लेने के लिए किसानों को अपनी जमीन की फर्द और पहचान पत्र दिखाना होगा। यानी जिन किसानों के पास जमीन से संबंधित दस्तावेज और आईडी कार्ड उपलब्ध होंगे, वे प्रस्तावित छूट के पात्र होंगे। इससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज मंडियों में बेचने पर लगने वाली फीस में राहत मिल सकेगी। किसानों को मिलने वाली इस छूट का उद्देश्य स्थानीय उत्पादकों को मंडी में कारोबार करने में सहूलियत देना है। मंडी फीस में आधी छूट मिलने से पात्र किसानों का खर्च कम हो सकता है। हालांकि, यह सुविधा भी प्रस्ताव को मंजूरी मिलने और लागू होने के बाद ही उपलब्ध होगी।
चंडीगढ़ नगर निगम की मंडी से जुड़ी कमेटी ने यह प्रस्ताव तैयार किया है। कमेटी के सभी सदस्य संबंधित इलाकों के पार्षद हैं। अब इस प्रस्ताव को अक्टूबर में होने वाली नगर निगम की हाउस मीटिंग में पेश किया जाएगा। हाउस मीटिंग में प्रस्ताव पर चर्चा और मंजूरी मिलने के बाद इसे प्रशासन के पास भेजा जाएगा। प्रशासन की मंजूरी मिलने पर ही नए नियम लागू किए जा सकेंगे। इसके बाद रंगीन लाइटों के इस्तेमाल, चालान, लाइसेंस सस्पेंड करने और किसानों को मंडी फीस में छूट देने की व्यवस्था लागू हो सकती है। फिलहाल ये सभी प्रावधान प्रस्ताव के स्तर पर हैं। अंतिम फैसला नगर निगम की हाउस मीटिंग और प्रशासन की मंजूरी के बाद होगा। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो चंडीगढ़ की सब्जी मंडियों में वेंडरों के लिए नए नियम लागू होंगे और ग्राहकों को सामान बेचने के तरीके पर निगरानी बढ़ाई जा सकेगी।
