Jind News: जींद में सिर्फ एक ‘तो’ शब्द पर बिगड़ी बात, बिजली कर्मियों और वकील का विवाद बना भाकियू का बड़ा आंदोलन
जींद में सिर्फ एक 'तो' शब्द पर बिगड़ी बात, बिजली कर्मियों और वकील का विवाद बना भाकियू का बड़ा आंदोलन
Jind News: हरियाणा के जींद जिले में एक मामूली शिकायत से शुरू हुआ बिजली कर्मचारियों और वकील के बीच का विवाद अब तूल पकड़ चुका है। सफीदों के हाट गांव (Safidon Bar Association News) स्थित पावर हाउस से उठी यह चिंगारी अब पूरे जिले के प्रशासनिक और किसान हलकों में आग की तरह फैल रही है। मामला सफीदों बार एसोसिएशन की समझौता टेबल तक पहुंचा जरूर, लेकिन बातचीत सुलझने के बजाय सिर्फ एक शब्द पर आकर बिखर गई।
जब बार पदाधिकारियों ने आरोपी बिजली कर्मचारियों के सामने वकील (Jind Electricity Employee Lawyer Dispute) से माफी मांगने की शर्त रखी, तो कर्मचारियों ने कह दिया कि “अगर हमसे कोई गलती हुई तो हम माफी मांगते हैं।” इस ‘तो’ शब्द ने बार एसोसिएशन के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा दी। अधिवक्ताओं को कर्मचारियों का यह रवैया टालमटोल भरा लगा और उन्होंने उसी क्षण वार्ता की टेबल छोड़कर मामले को आर-पार की लड़ाई में बदल दिया।
16 सितंबर की वो खौफनाक रात: मारपीट से लेकर गिरफ्तारी तक की पूरी इनसाइड स्टोरी
विवाद की शुरुआत 16 सितंबर की रात को हुई थी। वकील प्रवीण बूरा का आरोप है कि वह गांव के पावर हाउस में बिजली की शिकायत दर्ज कराने गए थे, जहां मौजूद बिजली कर्मियों ने उनके साथ गाली-गलौज करते हुए बेरहमी से मारपीट की। इसके बाद 17 सितंबर को खानपुर मेडिकल कॉलेज में वकील का मेडिकल परीक्षण हुआ और सफीदों पुलिस ने एसडीओ तथा दो जेई समेत 5 कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कर लिया।
पुलिस कार्रवाई तेज हुई तो 23 सितंबर को लाइनमैन रवि की गिरफ्तारी हो गई। इसके विरोध में भड़के बिजली कर्मचारी तुरंत पैन-डाउन और प्लास हड़ताल पर चले गए। दूसरी तरफ, 20 सितंबर से भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) और ग्रामीणों ने हाट पावर हाउस के बाहर पक्का मोर्चा खोल दिया, जिसे बार एसोसिएशन का भी पूरा समर्थन मिल गया।
दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे: कहीं राजनीतिक साजिश का आरोप तो कहीं इंसाफ की गुहार
सफीदों बार के प्रधान पुरुषोत्तम राणा का साफ कहना है कि उनके साथी वकील प्रवीण बूरा को बुरी तरह पीटा गया था, जिसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट में भी हुई है। बार एसोसिएशन शांतिपूर्ण हल चाहती थी, लेकिन बिजली कर्मचारियों का माफी मांगने का अंदाज अहंकार से भरा हुआ था। वे अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थे, इसलिए बातचीत रोकनी पड़ी।
इसके उलट बिजली कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों—नरेश देशवाल और सुरेश खर्ब का दावा बिल्कुल अलग है। उनका आरोप है कि वकील प्रवीण बूरा ने शराब के नशे में देर रात पावर हाउस का दरवाजा पीटा और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के साथ खुद मारपीट शुरू की। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने वकील को खुद गाड़ी में बिठाकर सुरक्षित घर भिजवाया था, लेकिन मामले को जानबूझकर राजनीतिक रंग देकर झूठा केस दर्ज करवाया गया है।
किसान आंदोलनों के दिग्गजों की एंट्री से प्रशासन के हाथ-पांव फूले
हाट गांव में चल रहे धरने में 25 सितंबर को प्रदेश के चर्चित किसान नेता सुरेश कोथ और अभिमन्यु कोहड़ की एंट्री ने इस स्थानीय विवाद को राजकीय स्वरूप दे दिया है। (Haryana Power House Row) 28 सितंबर को उग्र ग्रामीणों और भाकियू कार्यकर्ताओं ने सफीदों एसडीएम कार्यालय का घेराव भी किया। वहीं वकील के समर्थन में सफीदों बार ने कई दिनों तक काम ठप (वर्क सस्पेंड) रखा है।
धरने की अगुवाई कर रहे नवीन मलिक और ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की फोन लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड खंगालकर उनकी तुरंत गिरफ्तारी करे। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन दोनों पक्षों को शांत कराने में नाकाम दिख रहे हैं, और जींद की सियासत इस ‘तो’ शब्द के इर्द-गिर्द पूरी तरह से गरमा चुकी है।
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