Punjab Lok Adalat Staff Crisis : पंजाब की स्थाई लोक अदालतों में कर्मचारियों का भयंकर संकट
पंजाब की स्थाई लोक अदालतों में कर्मचारियों का भयंकर संकट
Punjab Lok Adalat Staff Crisis : आम नागरिकों को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने के दावे के साथ शुरू की गई पंजाब की स्थाई लोक अदालतें (पीएलए) आज स्वयं न्याय और संसाधनों के लिए तरस रही हैं। वर्ष 2002 में स्थापित इन लोक अदालतों का गठन हुए करीब 24 वर्ष का समय बीत चुका है, किंतु विडंबना यह है कि राज्य सरकार आज तक इनके लिए सेवा नियम (सर्विस रूल्स) अधिसूचित नहीं कर पाई है।
इस प्रशासनिक विफलता और अदालतों में कर्मचारियों के खाली पड़े पदों के चलते मुकदमों की सुनवाई ठप पड़ रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अहलमद के 94 फीसदी पद खाली, नोटिस तामील कराने को अमला नहीं
न्यायालय में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार स्थाई लोक अदालतों में कर्मचारियों का संकट अत्यंत गहरा चुका है। सबसे चिंताजनक स्थिति अहलमद के पदों की है, जहां कुल 17 स्वीकृत पदों में से 16 पद यानी लगभग 94 प्रतिशत स्थान खाली पड़े हैं। इसके अतिरिक्त स्टेनो टाइपिस्ट के 17 में से 7 पद रिक्त चल रहे हैं।
मुकदमों की अदालती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और संबंधित पक्षों तक नोटिस पहुंचाने वाले प्रोसेस सर्वर के 22 पद खाली होने के कारण समय पर समन नहीं तामील हो पा रहे हैं। यद्यपि इन पदों को फरवरी 2025 में प्रशासनिक मंजूरी दी जा चुकी थी, लेकिन नियम तय न होने से भर्ती प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।
करोड़ रुपये से अधिक बजट मौजूद, फिर भी इच्छाशक्ति का अभाव
पीपुल्स वेलफेयर सोसाइटी द्वारा दायर जनहित याचिका में यह उजागर हुआ है कि समस्या धन की कमी नहीं बल्कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति का अभाव है। प्रांतीय वित्तीय सेवा कोष के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्थाई लोक अदालतों हेतु 6.07 करोड़ रुपये का भरपूर बजट आवंटित है। इसके बावजूद रिक्त पदों पर नियुक्तियां न होना राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
हाईकोर्ट ने पूछा—पर्याप्त फंड के बाद भी नियुक्ति में देरी क्यों?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़े शब्दों में आड़े हाथों लिया। अदालत ने सरकार से सवाल किया है कि जब लोक अदालतों के संचालन के लिए पर्याप्त वित्तीय फंड उपलब्ध है, तो फिर भर्ती के लिए सेवा नियमों को अधिसूचित करने और आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति करने में इतनी देरी क्यों की जा रही है? न्यायालय ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करे।
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