Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय शोध पद्धति कार्यशाला का शुभारंभ, गुणवत्तापूर्ण शोध पर दिया गया जोर
Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय शोध पद्धति कार्यशाला का शुभारंभ, गुणवत्तापूर्ण शोध पर दिया गया जोर
Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा तीन दिवसीय शोध पद्धति कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को शोध के विभिन्न दृष्टिकोणों, पद्धतियों एवं प्रक्रियाओं से अवगत कराना तथा उन्हें व्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए प्रेरित करना है। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में 100 से अधिक विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति प्रो. विजय कुमार तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के सेंटर फॉर इनर एशियन स्टडीज की सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. मोंदिरा दत्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश मिश्रा ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्यों एवं महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि व्यवस्थित, सार्थक एवं विश्वसनीय शोध के लिए शोध पद्धति की गहन समझ आवश्यक है। इस प्रकार की कार्यशालाएं शोधार्थियों को शोध की विभिन्न प्रक्रियाओं एवं व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

हकेवि के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने अपने संबोधन में गुणवत्तापूर्ण शोध एवं सुदृढ़ शोध पद्धति के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में अकादमिक उत्कृष्टता और सुदृढ़ शोध वातावरण के निर्माण के लिए व्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण शोध आवश्यक है। शोधार्थियों को शोध कार्य में पद्धतिगत स्पष्टता, गंभीरता एवं अकादमिक मानकों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति प्रो. विजय कुमार ने अपने संबोधन में व्यवस्थित एवं गहन शोध के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने शोधार्थियों को अपने अकादमिक कार्यों के प्रति गंभीर दृष्टिकोण अपनाने तथा शोध की प्रक्रिया में स्पष्ट एवं उपयुक्त पद्धतियों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शोध कार्य में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक विश्लेषण एवं पद्धतिगत स्पष्टता की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. रमेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा कार्यशाला के सफल आयोजन में उनके योगदान की सराहना की।
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