Navneet Kaur Hockey: शाहाबाद की बेटी नवनीत कौर का कमाल, भारत ने 44 साल बाद जीता महिला हॉकी का गोल्ड
शाहाबाद की बेटी नवनीत कौर का कमाल, भारत ने 44 साल बाद जीता महिला हॉकी का गोल्ड
Navneet Kaur Hockey: हरियाणा की माटी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर देश का मस्तक गर्व से ऊंचा किया है। कुरुक्षेत्र जिले के हॉकी गढ़ कहे जाने वाले शाहाबाद की बेटी और भारतीय महिला हॉकी टीम की वाइस-कैप्टन नवनीत कौर ने एशियन गेम्स में वो कर दिखाया, जिसका इंतजार देश पिछले चार दशकों से कर रहा था। भारतीय महिला टीम ने खिताबी मुकाबले में मजबूत प्रतिद्वंद्वी चीन को 1-0 से शिकस्त देकर 44 साल का सूखा खत्म किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस शानदार जीत के साथ ही भारत ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक-2028 के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया है।
पूरे टूर्नामेंट में नवनीत कौर का बल्ला आग उगलता नजर आया। वाइस-कैप्टन के तौर पर न केवल उन्होंने अग्रिम पंक्ति की अगुवाई की, बल्कि कुल 10 गोल दागकर भारत की जीत की पटकथा लिखी। नवनीत ने प्रतियोगिता के दौरान 7 बेहतरीन फील्ड गोल, 2 पेनल्टी कॉर्नर और 1 पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में तब्दील किया। फाइनल मैच में भी उन्होंने मैदान के हर कोने में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और दबाव के पलों में टीम को लगातार गाइड करती दिखीं।
‘लास्ट मिनट में जब नवनीत के पास आई बॉल, तब आई जान में जान’— भावुक हुए पिता बूटा सिंह
शाहाबाद में नवनीत के घर पर मैच की शुरुआत से ही सांसें थमी हुई थीं। खिताबी जीत के बाद नवनीत के पिता बूटा सिंह ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए बताया कि मुकाबला बेहद सांसे थमा देने वाला था। चीन की टीम लगातार बराबरी के लिए हमले बोल रही थी और आखिरी सीटी बजने तक दिल की धड़कनें बढ़ी हुई थीं।
बूटा सिंह ने बताया, “मैच खत्म होने में करीब एक मिनट का वक्त बचा था और हमारी सांसें अटकी हुई थीं। तभी बॉल नवनीत के पास आई। उसने बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए गेंद पर नियंत्रण बनाया और चीनी खिलाड़ियों को दूर रखा। उसी पल हमें यकीन हो गया कि अब गोल्ड मेडल भारत की झोली में आ चुका है।” उन्होंने कहा कि कप्तान और कोच ने नवनीत पर जो भरोसा जताया था, उसने वाइस-कैप्टन के रूप में उसे शत-प्रतिशत मैदान पर उतारा।
‘पापा, बाद में बात करती हूं!’— मैदान पर गूंजे ढोल-नगाड़े, शाहाबाद में मना दीवाली जैसा जश्न
गोल्ड मेडल जीतने के ठीक बाद नवनीत ने अपने पिता को फोन लगाया, लेकिन जीत के उत्साह के बीच ज्यादा बात नहीं हो सकी। बूटा सिंह ने मुस्कुराते हुए बताया, “नवनीत बेहद खुश और उत्साहित थी। मैदान पर बैकग्राउंड में जीत के गाने बज रहे थे और शोर इतना था कि आवाज साफ नहीं आ रही थी। उसने बस इतना कहा— पापा, बहुत शोर है, बाद में बात करते हैं।”
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद कुरुक्षेत्र और शाहाबाद में जश्न का माहौल है। पड़ोसियों और खेल प्रेमियों का नवनीत के घर तांता लगा हुआ है। भारतीय टीम के कोच ने भी परिवार को बधाई देते हुए इसे पूरे देश और बेटियों की मेहनत का परिणाम बताया। 44 साल बाद महिला हॉकी में मिले इस स्वर्ण ने साबित कर दिया है कि हरियाणा की बेटियां जब मैदान में उतरती हैं, तो इतिहास बनना तय होता है।
