October 3, 2026

Haryana Land Acquisition: पानीपत, करनाल और अंबाला में रेल प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण, 30 दिन में दें आपत्ति

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Haryana Land Acquisition: पानीपत, करनाल और अंबाला में रेल प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण, 30 दिन में दें आपत्ति

पानीपत, करनाल और अंबाला में रेल प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण, 30 दिन में दें आपत्ति

Haryana Land Acquisition: उत्तर भारत के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण रेल गलियारों में शुमार दिल्ली-पानीपत-अंबाला रूट पर ट्रेनों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए रेलवे ने एक बड़ा कदम बढ़ाया है। मौजूदा दो लाइनों पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए अब इस पूरे रेल मार्ग पर तीसरी और चौथी अतिरिक्त लाइन बिछाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। करीब 5,983 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट वाली इस महापरियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है।

रेल मंत्रालय के अधीन उत्तर रेलवे निर्माण संगठन ने इस संबंध में भारत के राजपत्र (Gazette Notification) में अधिसूचना जारी कर दी है। परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद दिल्ली से पंजाब, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर की ओर जाने वाली ट्रेनों की गति में न केवल इजाफा होगा, बल्कि इस रूट पर नई यात्री व मालगाड़ियां चलाने की क्षमता में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

पानीपत, करनाल और अंबाला की जमीन होगी अधिग्रहित; 30 दिनों का मिला समय

रेलवे द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, इस परियोजना के निर्माण कार्य के लिए हरियाणा के तीन प्रमुख जिलों—पानीपत, करनाल और अंबाला के विभिन्न गांवों व कस्बों की भूमि को चिह्नित किया गया है। रेल विकास के लिए जिन जमीनों का अधिग्रहण किया जाना है, उनके खसरा नंबर और रकबे का ब्योरा अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है।

उत्तर रेलवे ने जमीन से जुड़े हितधारकों और किसानों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया है। जिन भू-स्वामियों की जमीन इस रेल लाइन के दायरे में आ रही है या जिनका किसी भी तरह का हित जुड़ा है, वे अधिसूचना जारी होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर अपनी लिखित आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। यह आपत्ति संबंधित जिले के जिला राजस्व अधिकारी (DRO), जो कि सक्षम प्राधिकारी हैं, के कार्यालय में जमा कराई जा सकती है।

मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों की लेट-लतीफी से मिलेगी निजात

वर्तमान समय में दिल्ली-पानीपत-अंबाला रेल मार्ग पर पैसेंजर, एक्सप्रेस और मालगाड़ियों के भारी दबाव के कारण अक्सर ट्रेनों को आउटर स्टेशनों पर रोकना पड़ता है। दो अतिरिक्त ट्रैक तैयार होने के बाद मालगाड़ियों को अलग कॉरिडोर मिल सकेगा, जिससे शताब्दी, वंदे भारत और सुपरफास्ट जैसी प्रीमियम यात्री गाड़ियों का संचालन बिना किसी बाधा के समय पर हो सकेगा।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होते ही टेंडर जारी कर सिविल कंस्ट्रक्शन का काम तेजी से शुरू कर दिया जाएगा। इस बहुप्रतीक्षित रेल विस्तार से न केवल हरियाणा बल्कि पूरे उत्तर भारत के करोड़ों रेल यात्रियों को आने वाले समय में सीधे तौर पर सुविधा मिलेगी।

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