Kaithal News: आंगनबाड़ी और आशा वर्करों का कैथल में बड़ा प्रदर्शन, सांसद नवीन जिंदल को सौंपा ज्ञापन
आंगनबाड़ी और आशा वर्करों का कैथल में बड़ा प्रदर्शन, सांसद नवीन जिंदल को सौंपा ज्ञापन
Kaithal News: हरियाणा के कैथल में अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन, आशा वर्कर और मिड-डे मील वर्करों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। (Kaithal News Today) रविवार दोपहर शहर की हनुमान वाटिका (Hanuman Vatika Kaithal) में सैकड़ों की संख्या में जुटी महिला कर्मचारियों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए अपनी आवाज बुलंद की। सभा के उपरांत प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से सांसद नवीन जिंदल के प्रतिनिधि को अपनी मांगों का एक ज्ञापन सौंपा और केंद्र व राज्य सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई।
दशकों पुरानी योजनाओं में भी सम्मानजनक दर्जे की जंग
प्रदर्शन के दौरान यूनियन की प्रांतीय व स्थानीय महिला नेताओं—शकुंतला, रानी, सुषमा, सुनीता, आशा और प्रवीन कुमारी ने सरकार की नीतियों पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि एकीकृत बाल विकास योजना (ICDS) 2 अक्टूबर 1975 से शुरू हुई थी, जिसे अब 50 साल से अधिक समय हो चुका है और इसमें करीब 26 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कार्यरत हैं।
इसी तरह 1998 में शुरू हुई मिड-डे मील योजना में 25 लाख और 2006 से संचालित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत 10 लाख के करीब आशा वर्कर जमीनी स्तर पर सेवाएं दे रही हैं। इसके बावजूद सरकारों ने आज तक इन बुनियादी योजनाओं को न तो स्थाई विभाग का दर्जा दिया और न ही कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की।
न मजदूर माना, न कर्मचारी: मानदेय के नाम पर शोषण का आरोप
यूनियन नेताओं ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश में लगभग एक करोड़ महिलाएं कुपोषण और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में रीढ़ की हड्डी बनकर काम कर रही हैं। लेकिन विडंबना यह है कि दशकों की सेवा के बाद भी उन्हें न तो ‘मजदूर’ का दर्जा दिया गया है और न ही ‘कर्मचारी’ का। उन्हें महज ‘स्वयंसेविका’ या ‘मानदेय कर्मी’ कहकर टरका दिया जाता है। महिला वर्करों का साफ कहना है कि यह एक करोड़ महिला कर्मचारियों के श्रम का सीधे तौर पर शोषण है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बजट कटौती और अनिश्चित भविष्य को लेकर जताई चिंता
प्रदर्शनकारियों ने चिंता जताई कि बच्चों और महिलाओं के पोषण व स्वास्थ्य से जुड़ी इन अति-संवेदनशील परियोजनाओं के लिए (Minimum Wage Demand Anganwadi) बजट में लगातार कटौती की जा रही है।
उन्होंने सांसद नवीन जिंदल से मांग की कि वे संसद में उनकी आवाज उठाएं। (Haryana Anganwadi Union) महिला वर्करों की प्रमुख मांगों में पक्के कर्मचारी का दर्जा देना, 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करना, न्यूनतम वेतन तय करना और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन व ग्रेच्युटी की व्यवस्था करना शामिल है। वर्करों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।
