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Large family Poverty: 4 बीवियां और 58 बच्चे, फिर भी भुखमरी के कगार पर परिवार, अफगानिस्तान के इस शख्स की कहानी कर देगी हैरान

Large family Poverty: 4 बीवियां और 58 बच्चे, फिर भी भुखमरी के कगार पर परिवार, अफगानिस्तान के इस शख्स की कहानी कर देगी हैरान

4 बीवियां और 58 बच्चे, फिर भी भुखमरी के कगार पर परिवार, अफगानिस्तान के इस शख्स की कहानी कर देगी हैरान

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AAmandeep Singh

Large family Poverty: दुनिया में कब, कहां और कौन सी ऐसी अजीबोगरीब कहानी सामने आ जाए, जो किसी को भी हिलाकर रख दे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। इन दिनों अफगानिस्तान के उरुजगान प्रांत से एक ऐसा ही मामला इंटरनेट पर सुर्खियां बटोर रहा है, जिसे पढ़कर हर कोई सन्न रह गया है।

यहां रहने वाले 57 साल के मोहम्मद सादिक की जिंदगी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लग सकती है, लेकिन इसके पीछे का सच बेहद खौफनाक और दर्दनाक है। सादिक चार पत्नियों के पति हैं और कुल 70 बच्चों के पिता बन चुके हैं, (uruzgan man 70 children जिनमें से 58 बच्चे आज जीवित हैं। (afghanistan large family news) हालात इस कदर बेकाबू हैं कि इस विशाल परिवार का मुखिया अपने ही कई बच्चों के नाम तक भूल चुका है और उन्हें बस ‘बेटा’ कहकर पुकारने को मजबूर है।

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खंडहर जैसा घर और चूल्हा जलाने के लिए कागज का सहारा

हाल ही में बीबीसी (BBC) को दिए एक इंटरव्यू में सादिक ने अपनी तबाही और बेबसी की दास्तान बयां की। उनका आशियाना किसी खंडहर से कम नहीं है, जहां न तो पक्के दरवाजे हैं और न ही खिड़कियां। (afghanistan child marriage crisis) कमरों को आपस में बांटने के लिए सिर्फ फटे-पुराने पर्दों का सहारा लिया गया है। इस घर में गरीबी इस हद तक हावी है कि मासूम बच्चों को अक्सर भूखे पेट ही सोना पड़ता है।

कड़ाके की ठंड से बचने और दो वक्त की रोटी पकाने के लिए घर में लकड़ियां तक मौजूद नहीं हैं। हालात इतने बदतर हैं कि छोटे-छोटे बच्चे गलियों से कूड़ा-करकट और प्लास्टिक बीनकर लाते हैं, जिन्हें जलाकर किसी तरह चूल्हा गर्म किया जाता है। पैरों में पहनने के लिए जूते न होने की वजह से कई बच्चे नंगे पांव ही धूल-मिट्टी में घूमने को विवश हैं।

नाममात्र की कमाई और बाल विवाह का दर्द

इतने विशालकाय परिवार का भरण-पोषण करने के लिए मोहम्मद सादिक एक कार डीलरशिप पर दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। उन्हें एक कार बिकवाने पर महज 1,000 अफगानी (भारतीय मुद्रा में करीब 1,458 रुपये) मिलते हैं। (poverty in afghanistan viral news) इतनी मामूली सी आमदनी में चार पत्नियों और दर्जनों बच्चों का गुजारा करना असंभव सा है।

सादिक की पत्नियों की शादियां भी बेहद कम उम्र में कर दी गई थीं। कम उम्र में मातृत्व और उचित देखरेख के अभाव में उनके कई बच्चे बचपन में ही दम तोड़ चुके हैं। हालांकि, सादिक ने यह कभी साफ नहीं किया कि चरमराती आर्थिक स्थिति के बावजूद वे लगातार परिवार क्यों बढ़ाते रहे, लेकिन उन्होंने यह जरूर कुबूला कि वे अपने बच्चों को बेहतर जिंदगी देने में नाकाम रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगानिस्तान में मौजूदा हालातों के चलते बाल विवाह के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। कई परिवार अपनी आर्थिक तंगी के चलते बेटियों की कम उम्र में शादियां करने पर मजबूर हैं। अस्पतालों के आंकड़े बताते हैं कि कम उम्र की माताओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है, जो इस बात का प्रमाण है कि वहां का समाज किस गंभीर और अमानवीय मानवीय संकट से जूझ रहा है।

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