Yamunanagar News: यमुनानगर जिले के साढौरा में किसानों का गुस्सा अब सरकार के खिलाफ मुखर होने लगा है। शनिवार को स्थानीय रेस्ट हाउस में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत ग्रुप) की एक अहम बैठक जिला प्रभारी सुभाष शर्मा की अध्यक्षता में हुई, जिसमें किसानों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर लंबी चर्चा की गई। बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा गन्ने के रेट और फसल पंजीकरण में आ रही दिक्कतों का छाया रहा। किसान नेताओं ने दो टूक कहा कि यदि सरकार ने जल्द किसानों की सुध नहीं ली, तो सड़कों पर बड़ा आंदोलन देखने को मिलेगा।
शुरुआती दौर में ही जिला प्रभारी सुभाष शर्मा ने बिजली बोर्ड के निजीकरण के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे कुछ समय पहले भाकियू और बिजली कर्मचारियों ने मिलकर ऐसा कड़ा विरोध दर्ज कराया था कि सरकार को अपना कदम पीछे खींचना पड़ा था। उन्होंने साफ किया कि यदि भविष्य में इस तरह के जनविरोधी फैसले दोबारा थोपने की कोशिश हुई, तो किसान, मजदूर और कर्मचारी एक मंच पर आकर ईंट से ईंट बजा देंगे।
पंजीकरण की अव्यवस्था और गन्ने के दाम पर टिकी निगाहें
बैठक के दौरान भाकियू खंड प्रधान जनक राज पाण्डो ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। उनका कहना था कि पोर्टल और पंजीकरण की व्यवस्था आज भी पटरी पर नहीं लौट पाई है, जिसकी वजह से अन्नदाता दर-दर भटकने को मजबूर है। गन्ने का पिराई सीजन आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि सरकार ने अब तक गन्ने का नया समर्थन मूल्य तक तय नहीं किया है।
यूनियन ने कड़े शब्दों में मांग की है कि गन्ने का भाव तुरंत 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते गन्ने का भाव घोषित नहीं किया गया, तो किसान यूनियन बड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
बैठक में मौजूद रहे प्रमुख चेहरे
इस मौके पर स्थानीय स्तर पर संगठन को और मजबूत करने की रणनीति बनाई गई। बैठक में हल्का प्रधान सतपाल मानकपुर, शहीद भगत सिंह ग्रुप के इकबाल सिंह सरावीं, जसपाल सिंह नौशहरा, राजेश भोगपुर, भोपाल सिंह सबड़ी, कर्ण सिंह, लखविन्द्र सिंह, राकेश कुमार, विरेन्द्र सिंह, कुलविन्द्र सिंह, कुलप्रीत सिंह और हरविन्द्र सिंह सहित कई गणमान्य किसान नेता उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में किसानों के अधिकारों के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया।

