Rohtak XEN Suspended: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने के चौबीस घंटे के भीतर ही राज्य सरकार ने प्रशासनिक मोर्चे पर सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है। रोहतक जिले के महम उपमंडल में तैनात कार्यकारी अभियंता (XEN) संजीत कुमार को शनिवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) की ओर से जारी आदेशों के मुताबिक, संजीत कुमार को सस्पेंशन पीरियड के दौरान पंचकूला स्थित मुख्य कार्यालय से संबद्ध किया गया है। नियमों के तहत वे बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के अपना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। कुछ समय पहले ही एसडीओ से प्रमोट होकर एक्सईएन बने संजीत कुमार पर यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद लापरवाही बरतने के कारण की गई है।
मुख्यमंत्री की सख्ती और फोन न उठाने का खामियाजा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बिजली कर्मचारियों के बीच सफल वार्ता के बाद हड़ताल समाप्त हो गई थी। इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर में बिजली आपूर्ति को युद्धस्तर पर बहाल करने और सभी अधिकारियों को अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहने के निर्देश दिए थे।
बताया जा रहा है कि जब अधिकारियों की उपस्थिति की समीक्षा की जा रही थी, तब महम के एक्सईएन संजीत कुमार न तो अपने दफ्तर में मौजूद मिले और न ही उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के फोन कॉल रिसीव किए। इस बारे में जब बिजली निगम के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (SE) विजेंद्र नरवाल से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने स्पष्ट सूची मांगी थी कि कौन-कौन अधिकारी फील्ड में मुस्तैद हैं। संपर्क न हो पाने और कोई संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण उच्च स्तर पर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
45 घंटे चली हड़ताल और सरकार का आश्वासन
गौरतलब है कि हरियाणा के बिजली कर्मचारी गुरुग्राम और नूंह जिलों में निजी कंपनी ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को 25 साल के लिए बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस दिए जाने के खिलाफ आंदोलित थे। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के इस फैसले के विरोध में राज्यभर के बिजली कर्मी 22 अक्टूबर की रात 10 बजे से लेकर 23 अक्टूबर की शाम तक करीब 45 घंटे तक पूर्ण हड़ताल पर रहे थे।
इस दौरान कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। हालांकि, शुक्रवार शाम पंचकूला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज की मौजूदगी में कर्मचारी यूनियनों के साथ मैराथन बैठक हुई, जिसमें सरकार ने बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत आयोग के फैसले की समीक्षा कराने का भरोसा दिया। इसके बाद हड़ताल वापस ले ली गई थी।
मुख्यमंत्री ने मांगी थी हर जिले की रिपोर्ट
हड़ताल खत्म होने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेशभर में बिजली सप्लाई ट्रैक पर लाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए थे। रात 12 बजे तक सभी जिलों से बिजली आपूर्ति की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी और स्पष्ट किया गया था कि तकनीकी खराबी या फॉल्ट को तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
ऐसे समय में जब सरकार आपूर्ति सुचारू करने के लिए हर अधिकारी की जवाबदेही तय कर रही थी, महम के एक्सईएन द्वारा कथित तौर पर गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाना भारी पड़ गया। इस कार्रवाई से साफ है कि प्रशासनिक अमले में अब किसी भी प्रकार की कोताही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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