August 7, 2026

Chandigarh: सियासी गर्मी बढ़ी तो मेयर ने बदले तेवर, 227 करोड़ का प्रस्ताव दोबारा सदन में लाने को कहा

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Chandigarh: सियासी गर्मी बढ़ी तो मेयर ने बदले तेवर, 227 करोड़ का प्रस्ताव दोबारा सदन में लाने को कहा

चंडीगढ़ मेयर सौरभ जोशी

Chandigarh: नगर निगम की 31 जुलाई की जनरल हाउस बैठक में टेबल एजेंडों के जरिए करोड़ों रुपये के प्रस्ताव पारित कराने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। विपक्ष के हमलों के साथ-साथ अपनी ही पार्टी के पार्षदों के विरोध का सामना करने के बाद मेयर सौरभ जोशी को भी कदम पीछे खींचना पड़ा। उन्होंने नगर निगम आयुक्त अमित कुमार को पत्र लिखकर 227.70 करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजना के प्रस्ताव की तथ्यों के आधार पर जांच कराने और उसे संशोधित स्वरूप में अगली जनरल हाउस बैठक में दोबारा पेश करने का आग्रह किया है।

मेयर ने कमिश्नर को भेजे पत्र में कजौली वाटर वर्क्स से सेक्टर-39 वाटर वर्क्स तक 1200 मिमी व्यास की पीएससी पाइपलाइन बदलने की 227.70 करोड़ रुपये की परियोजना पर आयुक्त को भेजे पत्र में कहा कि एजेंडे के विवरण में परियोजना की लागत का उल्लेख था, लेकिन विषय (सब्जेक्ट) में इसका जिक्र नहीं किया गया। उनका कहना है कि इतने बड़े वित्तीय प्रस्ताव में लागत का स्पष्ट उल्लेख विषय में भी होना चाहिए, ताकि सभी पार्षद शुरुआत से ही उसके वित्तीय प्रभाव से पूरी तरह अवगत रहें। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और प्रस्ताव को आवश्यक संशोधनों के साथ अगली जनरल हाउस बैठक में दोबारा लाने का अनुरोध किया है। मेयर ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी विकास परियोजना का विरोध करना नहीं, बल्कि जनता के धन से जुड़े बड़े फैसलों में पारदर्शिता, स्पष्टता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों को सभी तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने का अवसर मिलना चाहिए और जनता के धन से जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण प्रस्ताव में पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए।

भाजपा के कई पार्षद नगर निगम आयुक्त अमित कुमार से मिले थे और करोड़ों रुपये के वित्तीय प्रस्तावों को बिना पूर्व सूचना और विस्तृत चर्चा के मंजूरी दिए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि इतने बड़े वित्तीय मामलों में सभी पार्षदों को पहले से पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे प्रस्तावों के तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का अध्ययन कर सकें। अपने ही पार्षदों से विरोध का सामना करने के बाद जोशी हरकत में आए और उन्होंने कमिश्नर को पत्र लिखा। उधर, आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे को लेकर वीरवार को गवर्नर हाउस मार्च का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एचएस लक्की ने भी पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक से मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक ₹227 करोड़ के प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाई जाए। ऐसे में टेबल एजेंडों को लेकर निगम की सियासत गरमा गई है।

 

आप का हमला, बोली- दो पन्नों के टेबल एजेंडे से कराई मंजूरी

आम आदमी पार्टी ने 227.70 करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजना को लेकर भाजपा और नगर निगम प्रशासन पर सीधा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि इतने बड़े वित्तीय प्रस्ताव को महज दो पन्नों के टेबल एजेंडे के जरिए अंतिम समय में सदन में रखकर मंजूरी दिला दी गई, ताकि पार्षदों को इसे पढ़ने और समझने का मौका ही न मिले। आप नेताओं विजयपाल सिंह, ओमकार सिंह औलख, प्रेम गर्ग, योगेश ढींगरा और पूर्व महापौर कुलदीप कुमार ने कहा कि यह सिर्फ प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं, बल्कि नगर निगम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल है।

उनका दावा है कि पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन अधिनियम के तहत जनरल हाउस का एजेंडा 72 घंटे पहले और सप्लीमेंट्री एजेंडा 48 घंटे पहले पार्षदों को उपलब्ध कराना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में नियमों को दरकिनार किया गया। आप नेताओं ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये के प्रस्ताव को ‘टेबल एजेंडे’ की आड़ में पारित कराया गया। पार्टी ने पूरे मामले की शिकायत राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक को भेजते हुए जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

 

आज गवर्नर हाउस मार्च करेगी आप

आम आदमी पार्टी ने परियोजना की तकनीकी जानकारी को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि एजेंडे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन-सी पाइपलाइन बदली जानी है, उसकी वर्तमान स्थिति क्या है, किस प्रकार की पाइप का इस्तेमाल होगा और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) सहित अन्य तकनीकी दस्तावेज क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए। पार्टी ने मांग की है कि प्रस्ताव को नियमित प्रक्रिया के तहत दोबारा सदन में लाया जाए और उससे संबंधित सभी तकनीकी एवं वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।

प्रेस वार्ता के बाद आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल नगर निगम आयुक्त अमित कुमार से भी मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आयुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि प्रस्तुत तथ्यों का परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वीरवार को गवर्नर हाउस मार्च कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

 

कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्यपाल से मांगी उच्चस्तरीय जांच

चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एच.एस. लक्की ने नगर निगम की 31 जुलाई को हुई 363वीं जनरल हाउस बैठक में टेबल एजेंडे के जरिए 227 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने को “227 करोड़ का टेबल एजेंडा घोटाला” करार दिया है। लक्की ने चेतावनी दी कि यदि पूरे मामले में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो कांग्रेस इस मुद्दे को “सड़क से लेकर सदन और न्यायालय तक” पूरी मजबूती से उठाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतंत्र, पारदर्शिता और जनता के विश्वास पर सीधा हमला है। लक्की ने कहा कि भाजपा ने बहुमत के अहंकार में नगर निगम सदन को चर्चा का मंच नहीं, बल्कि “रबर स्टांप” बना दिया है।

करोड़ों रुपये का प्रस्ताव बिना पर्याप्त जानकारी, दस्तावेजों और बहस के पारित कराया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार की नीयत साफ थी तो प्रस्ताव को नियमानुसार 72 घंटे पहले पार्षदों के साथ साझा क्यों नहीं किया गया। आखिर ऐसी क्या आपात स्थिति थी कि जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये अंतिम समय में महज दो पन्नों के टेबल एजेंडे के सहारे मंजूर करवा दिए गए। उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर बात यह है कि 227 करोड़ रुपये की परियोजना का तकनीकी आधार तक सदन के सामने स्पष्ट नहीं किया गया। किस पाइपलाइन पर काम होगा, पुरानी पाइपलाइन बदली जाएगी या नई डाली जाएगी, लागत का आधार क्या है और परियोजना की तकनीकी आवश्यकता क्या है, जैसे सवालों के जवाब नहीं दिए गए। ऐसे में इतनी जल्दबाजी में प्रस्ताव पारित करने की जरूरत क्या थी।

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