Chandigarh Lawyers Protest: चंडीगढ़ जिला अदालत परिसर में लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) सिस्टम के विरोध में जिला बार एसोसिएशन ने बुधवार से चेन भूख हड़ताल शुरू कर दी। पंजाब भर में चल रहे आंदोलन के समर्थन में शुरू हुए इस प्रदर्शन का फैसला जिला बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी की सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के बाद लिया गया। वकीलों का कहना है कि मौजूदा LADC व्यवस्था के स्थान पर पहले की पैनल आधारित कानूनी सहायता प्रणाली को दोबारा लागू किया जाना चाहिए। बार एसोसिएशन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था का असर बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के पेशे और आजीविका पर पड़ा है। इसी कारण आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।
पहले दिन पदाधिकारियों ने संभाला मोर्चा
भूख हड़ताल के पहले दिन जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक चौहान, उपाध्यक्ष संदीप गुज्जर, सचिव अमीश शर्मा, कोषाध्यक्ष उज्ज्वल भसीन के साथ अधिवक्ता मुकेश कुमार, धर्मेंद्र सिंह, ए.एस. गुजराल, आर.एल. मौर्य और नरेश कुमार धरने पर बैठे। बार एसोसिएशन ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और इसका उद्देश्य सरकार तक वकीलों की मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से पहुंचाना है।
पुरानी पैनल व्यवस्था बहाल करने की मांग
वकीलों का कहना है कि पंजाब के अधिवक्ता लंबे समय से LADC सिस्टम का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि पहले लागू पैनल आधारित कानूनी सहायता व्यवस्था अधिक प्रभावी थी और उससे बड़ी संख्या में वकीलों को काम मिलता था। एसोसिएशन के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई अधिवक्ताओं के कामकाज और आय पर असर पड़ा है। इसलिए सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सभी वकीलों से एकजुट होने की अपील
जिला बार एसोसिएशन ने सभी अधिवक्ताओं से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। संगठन का कहना है कि वकालत पेशे के हितों की रक्षा के लिए सभी वकीलों का एक मंच पर आना जरूरी है। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास है।
न्यायिक अधिकारियों और सरकार से सहयोग की मांग
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक चौहान, उपाध्यक्ष संदीप गुज्जर, सचिव अमीश शर्मा और कोषाध्यक्ष उज्ज्वल भसीन ने न्यायिक अधिकारियों से अपील की कि भूख हड़ताल में शामिल वकीलों के मामलों में कोई प्रतिकूल आदेश पारित न किया जाए, ताकि उनके मुवक्किलों के हित प्रभावित न हों। एसोसिएशन ने उम्मीद जताई कि पंजाब सरकार, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और अन्य संबंधित अधिकारी जल्द वकीलों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। उनका कहना है कि संवाद के जरिए LADC सिस्टम से जुड़े मुद्दों का समाधान निकाला जा सकता है, जिससे न्याय व्यवस्था भी सुचारु रूप से चलती रहे और वकीलों के हित भी सुरक्षित रहें।

