Punjabi Cinema Development: पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के विकास और कलाकारों के हितों को लेकर पंजाबी फिल्म एवं टेलीविजन कलाकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की। पंजाबी फिल्म एंड टेलीविजन एक्टर्स एसोसिएशन (पीएफटीएए) के जनरल सेक्रेटरी और अभिनेता बिन्नू ढिल्लों के नेतृत्व में हुई इस बैठक में फिल्मों की पाइरेसी, कलाकारों की सामाजिक सुरक्षा, वरिष्ठ कलाकारों के लिए आर्थिक सहायता और पंजाबी सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत मंच देने सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल में पंजाबी फिल्म जगत के कई जाने-माने कलाकार शामिल रहे। कलाकारों ने पंजाब और चंडीगढ़ से जुड़े फिल्म उद्योग के सामने मौजूद व्यावहारिक चुनौतियों को केंद्रीय मंत्री के सामने रखा और उनके समाधान के लिए सहयोग की मांग की।
बैठक में फिल्म पाइरेसी को पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के सामने एक बड़ी चुनौती बताया गया। कलाकारों ने कहा कि अवैध तरीके से फिल्मों के प्रसार से निर्माताओं और फिल्म उद्योग को आर्थिक नुकसान होता है, इसलिए इसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जरूरत है। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भरोसा दिलाया कि पाइरेसी रोकने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान लाने पर काम किया जाएगा। चर्चा के दौरान दोषियों के लिए सात साल तक की सजा का प्रावधान शामिल करने की बात भी सामने आई। कलाकारों के लिए पाइरेसी पर प्रभावी नियंत्रण सिर्फ फिल्मों की कमाई से जुड़ा मुद्दा नहीं है। इसका असर फिल्म निर्माण, तकनीकी कर्मचारियों, कलाकारों और पूरी इंडस्ट्री की आर्थिक व्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में पाइरेसी पर सख्त कार्रवाई की मांग पंजाबी फिल्म जगत के लिए अहम मानी जा रही है।
प्रतिनिधिमंडल ने पंजाबी सिनेमा में लंबे समय तक योगदान देने वाले वरिष्ठ कलाकारों के हितों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। मांग की गई कि 80 से 85 वर्ष की उम्र पार कर चुके बुजुर्ग कलाकारों को मानदेय दिया जाए, ताकि लंबे समय तक कला जगत को योगदान देने वाले कलाकारों को आर्थिक सहारा मिल सके। बैठक में फिल्म और टेलीविजन कलाकारों के लिए ग्रुप इंश्योरेंस की सुविधा शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया। कलाकारों का कहना था कि ऐसी व्यवस्था से कलाकारों और उनके परिवारों को सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है।
चंडीगढ़ में सेंसर बोर्ड की व्यवस्था आसान बनाने पर जोर
बैठक के दौरान चंडीगढ़ में सेंसर बोर्ड से जुड़ी व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुचारू बनाने का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उत्तर भारत के फिल्म निर्माताओं को सेंसर प्रमाणपत्र हासिल करने की प्रक्रिया में सुविधा मिलनी चाहिए। कलाकारों ने चंडीगढ़ में इस व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत बताई, ताकि पंजाब सहित उत्तर भारत के फिल्म निर्माताओं को अपनी फिल्मों के प्रमाणन की प्रक्रिया में अनावश्यक दिक्कतों का सामना न करना पड़े। इससे क्षेत्रीय फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
पंजाबी सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान दिलाने के लिए प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ या पंजाब में राष्ट्रीय स्तर का फिल्म फेस्टिवल आयोजित कराने की मांग रखी। बैठक में उत्तर भारत में थिएटर और सिनेमा को प्रोत्साहित करने के साथ सांस्कृतिक संगठनों में स्थानीय कलाकारों और रंगमंच से जुड़े लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों से पंजाबी फिल्मों और कलाकारों को बड़ा मंच मिल सकता है। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को भी अपनी कला देशभर के दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है।
मलकीत रौनी बोले- 35 देशों तक पहुंचा पंजाबी सिनेमा
बैठक में अभिनेता मलकीत रौनी ने पंजाबी फिल्मों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाबी सिनेमा का दायरा केवल पंजाब तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, पंजाबी फिल्में करीब 35 देशों में देखी जाती हैं और वे विदेशों में भी पंजाब की संस्कृति और विरासत को पहचान दिलाने का माध्यम बन रही हैं। उन्होंने खेल पर आधारित फिल्म ‘हरजीता’ का उदाहरण देते हुए पंजाबी फिल्मों की व्यापक पहुंच पर बात की। प्रतिनिधिमंडल ने नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के माध्यम से पंजाब में योग्य फिल्म परियोजनाओं को आर्थिक सहायता देने की मांग भी रखी। इसके साथ ही पंजाब के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का एक निश्चित बजट तय करने का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इससे फिल्म, थिएटर और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े कलाकारों को बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
बैठक में पीएफटीएए के जनरल सेक्रेटरी बिन्नू ढिल्लों के अलावा देव खरौड़, शविंद्र महल, बीएन शर्मा, मलकीत रौनी, विनोद शर्मा, पद्मश्री जसपिंदर नरूला, सतिंदर सत्ती, प्रदीप जोशी, डॉ. वीरेंद्र, सर्वप्रिय अत्रे और सुखजीत पंढेर शामिल हुए। बैठक के अंत में कलाकारों ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का समय देने और पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आभार जताया। प्रतिनिधिमंडल ने सिनेमा के विकास के साथ कलाकारों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर आगे भी सकारात्मक पहल की उम्मीद जताई।
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