Chandigarh News: पीजीआई के आंगन में लहराया 110 फीट ऊंचा तिरंगा, राष्ट्रसेवा के संकल्प को मिली नई ऊंचाई
पीजीआई के आंगन में लहराया 110 फीट ऊंचा तिरंगा
Chandigarh News: पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) के कैरों प्रशासनिक ब्लॉक परिसर में बुधवार को देशभक्ति, सम्मान और गर्व का अनूठा दृश्य देखने को मिला। राष्ट्रगान की गूंज के बीच जैसे ही 110 फीट ऊंचा विशाल तिरंगा आसमान में लहराया, पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने राष्ट्रीय ध्वज फहराते हुए इसे पीजीआई के इतिहास का एक यादगार और गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विशाल तिरंगा नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा, समर्पण और उत्कृष्टता का प्रतीक है। प्रशासक ने कहा कि पीजीआई ने इस 110 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज की स्थापना कर केवल अपनी प्रतिष्ठा ही नहीं बढ़ाई, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के गौरव को भी नई ऊंचाई दी है। उन्होंने इस पहल के लिए पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल और पूरे संस्थान को बधाई दी।
समारोह में चंडीगढ़ के गृह सचिव मंदीप बराड़, पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल, डीन (एकेडमिक) प्रो. संजय जैन, डीन (रिसर्च) प्रो. संजीव हांडा, उपनिदेशक (प्रशासन) पंकज राय, वरिष्ठ चिकित्सक, फैकल्टी सदस्य, कर्मचारी, छात्र और बड़ी संख्या में अन्य लोग उपस्थित रहे। अपने संबोधन में प्रशासक ने कहा कि पीजीआई ने दशकों की निष्ठा, समर्पण और उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं के दम पर देशभर के लोगों का अटूट विश्वास जीता है। उत्तर भारत ही नहीं, देश के कोने-कोने और विदेशों से भी मरीज यहां उपचार के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की सबसे बड़ी पहचान उसकी इमारतें नहीं, बल्कि जनता का उस पर भरोसा होता है और पीजीआई ने यह सम्मान अपनी सेवा भावना से अर्जित किया है। कटारिया ने अंगदान, प्रत्यारोपण और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में पीजीआई की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (रोटो) नॉर्थ को लगातार मिल रही राष्ट्रीय पहचान संस्थान की उत्कृष्ट कार्यशैली का प्रमाण है। चिकित्सा अनुसंधान में पीजीआई का योगदान भारत की वैश्विक साख को भी मजबूत कर रहा है।
इससे पहले पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि 110 फीट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज भारत की एकता, बलिदान और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का स्थायी प्रतीक रहेगा। उन्होंने कहा कि पीजीआई लगातार आधुनिक तकनीक, शोध और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है। एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर शुरू हो चुका है, जबकि एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर भी जल्द पूरी तरह कार्यशील होगा। उन्होंने कहा कि संस्थान का लक्ष्य देश के प्रत्येक मरीज तक विश्वस्तरीय उपचार और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना है। समारोह का समापन डीन (एकेडमिक) प्रो. संजय जैन के धन्यवाद प्रस्ताव और राष्ट्रगान के साथ हुआ। अब पीजीआई परिसर में लहराता 110 फीट ऊंचा तिरंगा न केवल संस्थान की नई पहचान बनेगा, बल्कि यहां आने वाले लाखों मरीजों, उनके परिजनों, छात्रों और स्वास्थ्यकर्मियों को राष्ट्रसेवा, समर्पण और उत्कृष्टता का संदेश भी देता रहेगा।
तिरंगे के आदर्शों को जीते हैं पीजीआई के डॉक्टर
राज्यपाल ने तिरंगे के रंगों और पीजीआई की कार्यसंस्कृति के बीच समानता बताते हुए कहा कि केसरिया त्याग, सफेद शांति और हरा रंग प्रगति का संदेश देता है। पीजीआई के डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल कर्मचारी इन्हीं मूल्यों को अपनी निस्वार्थ सेवा से साकार करते हैं। वहीं अशोक चक्र की तरह यह संस्थान शोध, नवाचार और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों मदन लाल ढींगरा, शहीद भगत सिंह और शहीद ऊधम सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि तिरंगा हर भारतीय को साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है।
प्रशासक ने पीजीआई में शुरू हो चुके एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर, जल्द शुरू होने वाले एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर और प्रधानमंत्री द्वारा घोषित मेडिकल कॉलेज का उल्लेख करते हुए कहा कि ये परियोजनाएं देश की स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी। उन्होंने पीजीआई की ‘सारथी’ पहल की भी विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों को मरीजों की सेवा से जोड़ने वाला यह मॉडल जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे देश के अनेक अस्पताल अपना रहे हैं।
