Chandigarh news: चंडीगढ़ की एक फार्मा कंपनी में बुधवार को कर्मचारियों के लिए आयोजित लकी ड्रॉ में सविता के नाम कार निकली। पंचकूला के सेक्टर-16 की रहने वाली सविता कंपनी के बिलिंग विभाग में पिछले दो साल से काम कर रही हैं। इस ड्रॉ में कुल 35 कर्मचारी शामिल हुए थे। उनका नाम निकलने पर कंपनी की ओर से उन्हें करीब 5 लाख रुपये की ऑल्टो K10 कार दी गई। कार जीतने के बाद सविता ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनके लिए यह बड़ी बात है। उन्होंने कहा, “मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मेरे नाम गाड़ी निकली। वरना कमाकर गाड़ी खरीदना बड़ा मुश्किल है। यहां ऑफिस में माहौल काफी अच्छा है।” कंपनी में कर्मचारियों को कार देने की यह पहल नई नहीं है। जानकारी के मुताबिक, इसी साल पहले भी चार कर्मचारियों को पुराने मानकों के आधार पर कारें दी गई थीं। वहीं, पिछले साल दिवाली पर फार्मा कारोबारियों ने अपने कर्मचारियों को 51 कारें उपहार में दी थीं।
18 महीने से काम कर रहे कर्मचारियों को लकी ड्रॉ में मौका
फार्मा कारोबारी एमके भाटिया ने बताया कि ग्रुप की कंपनियों में कम से कम 18 महीने से काम कर रहे योग्य कर्मचारियों के नाम लकी ड्रॉ में शामिल किए गए। इसी साल लकी ड्रॉ के जरिए एक कार देने की घोषणा की गई थी, जिसके तहत बुधवार को विजेता का चयन किया गया। इस पहल में कर्मचारी के पद के बजाय निर्धारित योग्यता को आधार बनाया गया। इसका मतलब है कि सिक्योरिटी गार्ड से लेकर उच्च पदों पर काम करने वाले कर्मचारी तक कार जीतने के लिए पात्र हो सकते हैं, बशर्ते वे तय शर्तें पूरी करते हों। एमके भाटिया के मुताबिक, कंपनी बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को उनके काम और उपलब्धियों के आधार पर कार देने की परंपरा भी जारी रखेगी। इसके साथ ही लकी ड्रॉ के जरिए दूसरे योग्य कर्मचारियों को भी बड़ा पुरस्कार जीतने का अवसर दिया जाएगा। उनका कहना है कि कंपनी की तरक्की में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने वाले सभी कर्मचारियों का योगदान होता है। ऐसे में लकी ड्रॉ के माध्यम से अलग-अलग पदों पर काम करने वालों को भी कार पाने का मौका मिल सकता है। कंपनी का प्रयास है कि पुरस्कार केवल चुनिंदा कर्मचारियों तक सीमित न रहें, बल्कि निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले अधिक लोगों को भी इसमें भाग लेने का अवसर मिले।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस व्यवस्था में गाड़ी खरीदते समय मालिक की ओर से 15 प्रतिशत डाउन पेमेंट की जाती है। बाकी रकम की EMI कर्मचारी की सैलरी से हर महीने काटी जाती है। इसके अलावा कर्मचारी को पेट्रोल के लिए हर महीने 2,500 रुपये भी दिए जाते हैं। हालांकि, कार दिए जाने की प्रक्रिया और भुगतान की शर्तें कंपनी की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार लागू होती हैं। इसलिए कार मिलने को पूरी तरह बिना किसी भुगतान वाला उपहार मानने से पहले डाउन पेमेंट और EMI से जुड़ी शर्तों को समझना जरूरी है।
मुजफ्फरनगर से चंडीगढ़ तक का सफर, अब 12 कंपनियों का ग्रुप
एमके भाटिया मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने शुरुआती कारोबारी सफर में वहां मेडिकल स्टोर चलाया था। उनके मुताबिक, वर्ष 2002 में कारोबार में गिरावट आई और वह भारी कर्ज के दबाव में आ गए थे। उस समय स्थिति दिवालिया होने की कगार तक पहुंच गई थी।इसके बाद वर्ष 2015 में वह चंडीगढ़ आए और यहां फार्मास्युटिकल कारोबार शुरू किया। अब उनके मुताबिक, ग्रुप के तहत 12 कंपनियां चल रही हैं। कारोबार के विस्तार के साथ कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें पुरस्कार देने की पहल भी जारी है।
एमके भाटिया ने बताया कि उनके कार्यालय पंचकूला और चंडीगढ़ में हैं। पहले दिवाली पर कर्मचारियों को देने के लिए गाड़ियां कंपनी के नाम पर खरीदी जाती थीं, लेकिन अब सीधे कर्मचारी के नाम पर गाड़ी लेने की व्यवस्था अपनाई जा रही है। उनके अनुसार, अब तक 100 से ज्यादा कर्मचारियों को गाड़ियां दी जा चुकी हैं। कर्मचारियों की संख्या और कारों की संख्या बढ़ने के साथ अब कार्यालयों के आसपास पार्किंग की समस्या भी सामने आने लगी है। भाटिया ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए भी काम किया जा रहा है।
Click Here👉 चंडीगढ़ की खबरें पढनें के लिए लिंक पर क्लिक करें

