Chandigarh Police Martyrs: वर्दी का फर्ज निभाते हुए किसी ने आतंकियों से लोहा लिया, किसी ने बम धमाके में जान गंवाई तो कोई सड़क पर नाका लगाते हुए कर्तव्य की बलि चढ़ गया। देश की सुरक्षा और नागरिकों की हिफाजत के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले ऐसे ही वीरों की याद में बुधवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित पुलिस स्टेशन के मैदान में पुलिस स्मृति दिवस मनाया गया। शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर उन पुलिसकर्मियों को नमन किया गया, जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान दे दी। समारोह में शहीदों के परिजन भी मौजूद रहे। अपनों की शहादत की यादों के बीच उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
समारोह में चंडीगढ़ पुलिस के उन 10 वीरों को भी याद किया गया, जिन्होंने ड्यूटी के दौरान अपने प्राण गंवाए। इनमें इंस्पेक्टर जगजीत सिंह, इंस्पेक्टर सुच्चा सिंह, सब-इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह, एएसआई अमरजीत सिंह, एएसआई लालू राम, एएसआई अमीन चंद, हेड कांस्टेबल सुखजिंदर सिंह, कांस्टेबल शमशेर सिंह, कांस्टेबल सुखदर्शन सिंह और होमगार्ड स्वयंसेवक राजेश कुमार शामिल हैं। डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर वीर जवानों के बलिदान को सलाम किया। इस दौरान चंडीगढ़ पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। समारोह के अंत में दो मिनट का मौन रखकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी जवानों को याद किया गया।

एक सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 तक देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 154 अधिकारी और जवान ड्यूटी के दौरान शहीद हुए। इनमें बीएसएफ के 25, सीआरपीएफ के दो, सीआईएसएफ के चार, आरपीएफ के आठ, एसएसबी के पांच और आईटीबीपी के नौ जवान शामिल हैं। इनके अलावा विभिन्न राज्यों की पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी भी कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए। हर नाम के पीछे एक परिवार, अधूरे सपने और अपनों के लौटने की उम्मीद जुड़ी थी, लेकिन इन वीरों ने देश की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा।

पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास 21 अक्टूबर 1959 से जुड़ा है। उस दिन लद्दाख क्षेत्र में देश की सीमाओं की रक्षा के लिए तैनात पुलिस दल पर चीनी सैनिकों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में सीआरपीएफ के 10 जवान शहीद हो गए थे। तभी से हर साल 21 अक्टूबर को देशभर में पुलिस बल अपने शहीद साथियों को याद करते हैं। यह दिन उन वीरों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिनकी वजह से देश की सुरक्षा का संकल्प लगातार मजबूत बना हुआ है।
आतंकियों से भिड़े, बम धमाके में गंवाई जान

इंस्पेक्टर जगजीत सिंह ने 17 जुलाई 1988 को सेक्टर-45 में आतंकियों के ठिकाने पर छापे के दौरान अदम्य साहस दिखाया। मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए, लेकिन जगजीत सिंह को भी गोली लगी और वह मौके पर ही शहीद हो गए। 29 अगस्त 1991 को तत्कालीन एसएसपी की गाड़ी को निशाना बनाकर किए गए बम विस्फोट में एएसआई लालू राम और एएसआई अमीन चंद ने जान गंवाई। दोनों ने ड्यूटी निभाते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।इंस्पेक्टर सुच्चा सिंह जून 2013 में सेक्टर-17 जिला अदालत के पास रात में जांच के दौरान संदिग्ध दंपती से पूछताछ करते हुए शहीद हो गए। वहीं, 13 मार्च 2025 को जीरकपुर बैरियर पर नाके के दौरान तेज रफ्तार कार की टक्कर से कांस्टेबल सुखदर्शन सिंह और होमगार्ड स्वयंसेवक राजेश कुमार की जान चली गई।

